अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने विदेश नीति पर अपने पहले राजनयिक संबोधन में स्पष्ट संकेत दिए कि वे अपने पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप के नीतियों में व्यापक बदलाव करने जा रहे हैं। उन्होंने ‘अमेरिका इज बैक’ का एलान करते हुए न सिर्फ सऊदी अरब को यमन के खिलाफ हथियारों का समर्थन खत्म करने की घोषणा की, बल्कि चीन को भी कहा कि हम बीजिंग द्वारा पेश चुनौतियों का सीधे तौर पर सामना करेंगे।
चीन के मामले में बाइडन ने यह भी कहा कि अमेरिकी हित में उनका प्रशासन बीजिंग के साथ मिलकर काम करने से भी नहीं कतराएगा। बाइडन ने विदेश मंत्रालय के ‘फॉगी बॉटम’ मुख्यालय में संबोधित करते हुए कहा, हम चीन द्वारा आर्थिक शोषण का मुकाबला करेंगे, मानवाधिकारों, बौद्धिक संपदा और वैश्विक शासन पर चीन के हमले को कम करने के लिए दंडात्मक कार्रवाई करेंगे। बीजिंग के साथ मिलकर काम करने की तैयारी के साथ बाइडन ने कहा, हम अपने सहयोगियों, भागीदारों के साथ काम करके, वैश्विक संस्थानों में अपनी भूमिका को नया रूप देंगे और हमारी विश्वसनीयता व नैतिक अधिकार को पुन: हासिल करेंगे। बाइडन ने अपने पूर्ववर्ती डॉनल्ड ट्रंप की बेढंग विदेश नीति के बाद एक नए युग का वादा करते हुए चीन और रूस के प्रति आक्रामक नजरिए का संकेत भी दिया। उन्होंने कहा,
चीन-रूस की चुनौतियों का सामना करेंगे
बाइडन ने चीन-रूस के प्रति अपने भाषण में कहा, अमेरिकी नेतृत्व को उस बढ़ती तानाशाही का सामना करना होगा, जिसमें चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने तथा उसे बाधित करने का रूस का संकल्प शामिल है। हमें चुनौतियों का सामना करना होगा जिनमें महामारी, जलवायु संकट और परमाणु प्रसार शामिल हैं।
अमेरिकी गठबंधन हमारी सबसे बड़ी संपत्ति
बाइडन ने कहा, हम कूटनीति में सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करते हैं क्योंकि निवेश करना है बल्कि यह दुनिया के लिए सही है और हम ऐसा करते हैं। हम ऐसा शांति, सुरक्षा और खुशहाली के साथ जीने के लिए करते हैं। हम अपने हित के लिए भी ऐसा करते हैं। वैश्विक गठबंधन के बारे में उन्होंने कहा, अमेरिकी गठबंधन हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है।
यमन में युद्ध खत्म होना चाहिए
बाइडन ने यमन में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य अभियानों के लिए अपना समर्थन वापस लेते हुए कहा कि इस क्षेत्र में छह साल से जारी युद्ध खत्म होना चाहिए। हालांकि बाइडन ने अपने पुराने सहयोगी सऊदी अरब का समर्थन जारी रखा है। उन्होंने कहा, यमन में युद्ध ने मानवीय तबाही मचाई है और हम यमन में हथियारों की बिक्री समेत सभी अमेरिकी सहयोग को बंद कर रहे हैं। इस संघर्ष में लाखों लोग भुखमरी को मजबूर हैं। बता दें कि पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन ने यमन में हूथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ अरबों डॉलर की डील की थी।
सहयोगियों से रिश्ते मजबूत करेंगे, विश्व से फिर जुड़ेंगे
राष्ट्रपति जो बाइडन ने जोर दिया कि अमेरिका की कूटनीति पटरी पर लौट आई है और उनका प्रशासन अपने साझेदारों के साथ संबंधों में सुधार करके देश को एक बार फिर दुनिया से जोड़ेगा। उन्होंने कहा, हम सिर्फ अतीत की नहीं बल्कि वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का भी हल निकालेंगे। उन्होंने कहा हम अपने बल पर वैश्विक चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएंगे। इसके लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करना होगा। बाइडन ने कहा, हमें अमेरिका की कूटनीति में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों से शुरुआत करना चाहिए जिसमें स्वतंत्रता का बचाव करना, अवसरों की रक्षा करना, सार्वभौमिक अधिकारों को बनाए रखना, शामिल है।
जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर रोक
बाइडन ने जर्मनी से 9,500 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले पर औपचारिक रूप से रोक लगा दी है। पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने यह आदेश दिया था, लेकिन इस पर अमल शुरू नहीं किया गया था। बाइडन ने कहा कि जब तक रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन दुनियाभर में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी की समीक्षा नहीं कर लेते तब तक जर्मनी से सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले पर रोक लगा दी गई है।
रूस को जवाब देने में संकोच नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वे दिन बीत गए जब उनका देश रूस की आक्रामक कार्रवाई के सामने झुकता था। बाइडन ने रूस को चेताया कि उनका प्रशासन, मॉस्को को जवाब देने में संकोच नहीं करेगा। उन्होंने कहा, मैंने अपने पूर्ववर्ती (ट्रंप) से अलग रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति पुतिन को भी इस बारे में स्पष्ट कर दिया है। रूस ने हमारे चुनावों में दखल किया, साइबर हमले करवाए और हमारे नागरिकों को जहर दिया। बाइडन ने अमेरिकी हित में हम रूस के साथ मिलकर काम करने में भी अधिक प्रभावी साबित होंगे। उन्होंने कहा, रूस में विपक्षी नेता एलेक्सेई नवालनी को राजनीति से प्रेरित होकर जेल भेजा गया है।