अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के बाद जो बाइडन ने रविवार को सत्ता हस्तांतरण और नई सरकार के गठन का काम भी शुरू कर दिया है। इसके लिए उन्होंने BuildBackBetter.com नाम से वेबसाइट और @Transition46 के नाम से ट्विटर हैंडल लॉन्च किया है। बता दें कि जो बाइडन और उपराष्ट्रपति बनने जा रहीं भारतीय मूल की कमला हैरिस के सामने कोरोना, आर्थिक सुधार, नस्ली भेदभाव और जलवायु परिवर्तन जैस प्रमुख मुद्दे होंगे।
जीत से पहले बाइडन ने कहा था, जनता ने उन्हें कोरोना महामारी से बचाव और अर्थव्यवस्था पर काम करने के लिए वोट दिया है। वे राष्ट्रपति कार्यालय पहुंचने पर पहले दिन से अपनी योजना पर काम शुरू कर देंगे। उन्होंने दावा किया कि वे देश में 2.36 लाख लोगों की जान ले चुके वायरस को नियंत्रित कर लेंगे।
बता दें कि शनिवार को जब अमेरिकी चुनाव के नतीजे आए तो डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से बाइडन ने 290 इलेक्टोरल वोट हासिल किए वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को 214 वोट मिले। इसी के साथ जो बाइडन अमेरिका में 46वें राष्ट्रपति के रूप में चुने गए। वहीं, कमला हैरिस अमेरिका की पहली उपराष्ट्रपति बनीं।
जीत से पहले बाइडन ने कहा था, 'हमें याद रखना है कि हमारी राजनीति बेदर्द और खत्म न होने वाली लड़ाई नहीं है। हमारी राजनीति का मकसद राष्ट्र के लिए काम करना है। टकराव को भड़काना नहीं है, बल्कि समस्याओं का समाधान करना है। न्याय की गारंटी देना है। सबको समान अधिकार देने हैं। हमारे लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है। हम प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं लेकिन, हम दुश्मन नहीं हैं। हम अमेरिकी हैं।'
वहीं, जीत के बाद बाइडन ने ट्वीट कर कहा था, 'आपने मुझे अमेरिका जैसे महान देश का नेतृत्व करने के लिए चुना है, इसके लिए मैं आभारी हूं। आगे का काम कठिन होगा, लेकिन मैं आपसे यह वादा करता हूं कि मैं सभी अमेरिकियों के लिए राष्ट्रपति बनूंगा, चाहे आपने मुझे वोट दिया या नहीं।'
77 साल के बाइडन अब अमेरिकी इतिहास के सबसे अधिक आयु वाले राष्ट्रपति भी बन गए हैं। 20 नवंबर को उनका जन्म दिन है यानी वह 78 साल के हो जाएंगे। 20 जनवरी 2021 को बाइडन अमेरिका के 46वें राष्ट्पति के रूप में शपथ लेंगे। बता दें कि इस बार का अमेरिकी चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक था। खासकर कोरोना महामारी के दौर में चुनाव का होना। चीन, कोरोना, नस्ली भेदभाव और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों का चुनाव में हावी होना। इनके अलावा, अमेरिका में पहली बार ऐसा हुआ जो न सिर्फ ऐतिहासिक था, बल्कि भारत के लिए भी गर्व की बात थी।
दरअसल, अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की इस चुनाव में अहमियत बढ़ी। इसी का नतीजा रहा कि अमेरिका में पहली बार किसी भारतवंशी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया। साथ ही, राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार भारतीय मूल के वोटरों को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। हालांकि, अब देखना यह होगा कि भारत के हित में इसके मायने क्या होंगे?
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