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US: CIA के लिए भारतवंशी, रक्षा मंत्रालय में पुराना सहयोगी...जानें ट्रंप कैबिनेट में कौन-कौन हो सकता है शामिल

Thu, 07 Nov 2024 08:36 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप की अगली सरकार का स्वरूप क्या हो सकता है? किन बड़े नेताओं के उनके कैबिनेट से जुड़ने की चर्चाएं हैं। आइये जानते हैं...
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माइक पोम्पियो, डोनाल्ड ट्रंप और कश पटेल। - फोटो : ANI/US Govt.
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद डोनाल्ड ट्रंप अब जल्द ही अपने कैबिनेट गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। माना जा रहा है कि जनवरी में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले ही ट्रंप अपने मंत्रिमंडल के चेहरों को तय कर लेंगे। रिपब्लिकन नेता के कैबिनेट में कई नए और अहम चेहरों को लाए जाने का अनुमान है। हालांकि, इनमें एक नाम पुराने सहयोगी माइक पोम्पियो का भी हो सकता है। इतना ही नहीं ट्रंप कई बड़े नामों के साथ एक भारतवंशी कश्यप पटेल को भी कैबिनेट में जगह दे सकते हैं। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप की अगली सरकार का स्वरूप क्या हो सकता है? किन बड़े नेताओं के उनके कैबिनेट से जुड़ने की चर्चाएं हैं। आइये जानते हैं...

1. वित्त मंत्री के लिए पांच नामों की चर्चा
डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख आर्थिक सलाहकारों में से एक स्कॉट बेसेंट को अमेरिका में संभावित वित्त मंत्री के तौर पर देखा जा रहा है। येल यूनिवर्सिटी में कई वर्षों तक शिक्षण देने और हेज फंड निवेशक के तौर पर पहचान बना चुके बेसेंट के ट्रंप के साथ काफी गहरे रिश्ते भी रहे हैं। बेसेंट लगातार ट्रंप के अलग-अलग देशों पर आयात-निर्यात शुल्क लगाने के पक्षधर रहे हैं। 

- बेसेंट के अलावा ट्रंप के मुख्य दानकर्ताओं में शामिल रहे अरबपति हेज फंड मैनेजर जॉन पॉल्सन को भी वित्त मंत्रालय के लिए संभावित चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा फॉक्स बिजनेस नेटवर्क से जुड़े लैरी कुडलो, जो कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनके राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक भी रहे हैं, उन्हें भी इस पद का दावेदार माना जा रहा है। इस पद के लिए दो और नाम  रॉबर्ट लाइटहाइजर और हावर्ड लुटनिक का है। जहां लाइटहाइजर ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनके व्यापार प्रतिनिधि के तौर पर काम कर चुके हैं, वहीं लुटनिक लंबे समय से ट्रंप की आर्थिक नीतियो और उनके टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने के भी प्रशंसक रहे हैं। 
 

2. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के लिए 
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के पद के लिए रिचर्ड ग्रेनेल एक ऐसा नाम हैं, जो कि ट्रंप की पहली पसंद हो सकते हैं। दरअसल, ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ग्रेनेल अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया विभाग के कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं। इसके अलाावह जर्मनी में अमेरिकी राजदूत के तौर पर भी काम कर चुके हैं। इसी सितंबर में जब ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की तब ग्रेनेल उनके बीच निजी बैठक का हिस्सा भी बने थे। वह रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए पूर्वी यूक्रेन में एक स्वायत्त क्षेत्र बनाने का हल भी दे चुके हैं। हालांकि, कीव ने इसकी निंदा की थी। इतना ही नहीं ग्रेनेल का नाम दूसरे देश के नेताओं से निजी सौदेबाजी के लिए भी चर्चा में रह चुका है। 

3. विदेश मंत्री के लिए
अमेरिका के अगले विदेश मंत्री के लिए जो नाम सामने आ रहे हैं, उनमें रॉबर्ट ओब्रायन, अमेरिकी सीनेटर बिल हैगर्टी और सीनेटर मार्को रूबियो का नाम सबसे आगे है। 

- ओब्रायन ट्रंप के पिछले कार्यकाल में चौथे और आखिरी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के तौर पर काम कर चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद से हटने के बावजू ओब्रायन कई विदेशी नेताओं से अच्छे संबंध रखने के लिए जाने जाते हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू से भी मुलाकात की थी। हालांकि, कुछ मामलों में वह ट्रंप से इतर राय भी रखते हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष मसले पर वह अन्य रिपब्लिकन नेताओं से अलग यूक्रेन को वित्तपोषण का समर्थन करते हैं। इसके अलावा वह अमेरिका में टिकटॉक को बैन करने के भी समर्थक हैं।

- दूसरी तरफ बिल हैगर्टी जो कि टेनेसी से सीनेटर हैं, को रिपब्लिकन पार्टी में हर किसी से बेहतर संबंध रखने के लिए जाना जाता है। उन्हें विदेश मंत्री के पद के लिए सीनेट से मंजूरी मिलने में भी खास दिक्कत नहीं होगी। वह ट्रंप के पहले कार्यकाल में जापान में अमेरिकी राजदूत की भूमिका निभा चुके हैं। खासकर तब जब ट्रंप ने जापानी पीएम शिंजो आबे के साथ रिश्ते बेहतर होने की बात कही थी। यूक्रेन मुद्दे पर हैगर्टी के विचार ट्रंप से मिलते हैं और वह यूक्रेन को सैन्य पैकेज देने के खिलाफ वोट कर चुके हैं।

- मार्को रूबियो अमेरिका के फ्लोरिडा से सीनेटर हैं। वह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति पद के लिए उतरने के संभावितों में थे। वह सीनेट में लंबे समय से विदेश मामलों से जुड़े रहे हैं। खासकर लातिन अमेरिका और पड़ोसी देशों के मामले में। 

4. रक्षा मंत्री के लिए कौन-कौन संभावित?
ट्रंप प्रशासन में रक्षा मंत्रालय के लिए भी अमेरिका में तीन नामों पर चर्चा है। यह नाम है- माइक वॉल्ट्ज, माइक पोम्पियो और टॉम कॉटन के। माइक पोम्पियो, डोनाल्ड ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान सीआईए के निदेशक और विदेश मंत्री रह चुके हैं और अब रक्षा मंत्री पद के लिए काफी मजबूत नाम बताए जाते हैं। हालांकि, ट्रंप उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया विभाग या राजनयिक पद भी सौंप सकते हैं। हालांकि, यूक्रेन की सैन्य मदद को लेकर मुखर रहने वाले पोम्पियो ट्रंप के बाकी करीबियों से टकराव की स्थिति में भी आ सकते हैं।

- इसके अलावा पद के लिए माइक वॉल्ट्ज के नाम पर भी चर्चाएं हैं। वह पूर्व सैन्यकर्मी रहे हैं और फिलहाल फ्लोरिडा से सांसद हैं। वॉल्ट्ज को चीन मामलों का जानकार माना जाता है। चीन पर अमेरिका की निर्भरता कम करने से जुड़े कई विधेयकों को उन्होंने समर्थन दिया। अगले रक्षा मंत्री के लिए उनके नाम की चर्चाएं सबसे ज्यादा हैं।

- वहीं इस पद के लिए एक नाम टॉम कॉटन का है, जो कि हार्वर्ड कॉलेज और हार्वर्ड लॉ स्कूल के पढ़े हैं और एक आर्मी अफसर भी रह चुके हैं। वह आरकैंसस से अमेरिकी सीनेटर हैं। कॉटन को ट्रंप के अहम दानकर्ताओं में से एक माना जाता है। हैगर्टी की तरह उन्हें भी ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति पद का संभावित माना जा रहा था। कॉटन को यूक्रेन के सैन्य सहायता पैकेज के समर्थन के लिए जाना जाता है। ऐसे में यह बात रक्षा मंत्री बनने में उनके खिलाफ जा सकती है।
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5. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों पर 
ट्रंप के मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा लोगों की नजर सुरक्षा से जुड़े पदों को लेकर है। दरअसल, अमेरिका में सुरक्षा के कई आयाम और एजेंसियां हैं। ऐसे में होमलैंड सिक्योरिटी से लेकर सीआईए तक, ट्रंप प्रशासन में इन सभी में उनके करीबी शामिल रहेंगे। 

- सुरक्षा से जुड़े पदों के लिए एक नाम भारतवंशी कश्यप पटेल का है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वह अमेरिका की विदेश मामलों की खुफिया एजेंसी- सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के अगले निदेशक नियुक्त किए जा सकते हैं। पटेल लगातार डोनाल्ड ट्रंप के अभियान से भी जुड़े रहे हैं और उनके पिछले कार्यकाल में रक्षा और खुफिया विभागों में अहम उच्चस्तरीय जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

- इनमें एक नाम कीथ केलॉग का है, जो कि ट्रंप के पिछले कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर काम कर चुके हैं। वह एक रिटायर्ड लेफ्टिनेट जनरल हैं और सुरक्षा मामलों में ट्रंप के अहम सलाहकार माने जाते हैं। वह यूक्रेन को नाटो में शामिल करने के खिलाफ रहे हैं और युद्ध रुकवाने के लिए रूस-यूक्रेन को समझौते तक लाने की वकालत कर चुके हैं। 

- इसके अलावा ट्रंप कैबिनेट में सुरक्षा से जुड़े पद के लिए एक नाम टॉम होमैन का भी है। उनका नाम इस वक्त होमलैंड सिक्योरिटी विभाग से जोड़ा जा रहा है, जो कि अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। दरअसल, वह ट्रंप के पहले कार्यकाल में आव्रजन और कस्टम प्रवर्तन एजेंसी के कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं। होमैन ने अवैध आव्रजन को अपने अभियान के केंद्र में रखा है। ट्रंप भी अपनी रैलियों के दौरान कई मौकों पर उनकी तारीफ कर चुके हैं। 

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