अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है। ट्रम्प ने ट्वीट किया कि अगर ईरान लड़ाई चाहता है तो उसका आधिकारिक अंत हो जाएगा। ईरान अमेरिका को कभी धमकी नहीं दे। ट्रम्प ने रविवार रात इराक स्थित अमेरिकी दूतावास के पास रॉकेट हमले के बाद यह चेतावनी दी है।
1980 में इराक ने ईरान सीमा पर हवाई हमले किए थे। वह मानता था कि भीतरी राजनीति में उलझा ईरान कमजोर हो चुका है। ईरान के सीमाई विवाद वाले इलाकों पर कब्जा करने का यह अच्छा मौका है। ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खुमैनी का कहना है कि अमेरिका ने ही इराक को ईरान पर हमले की मंजूरी दी थी। अमेरिका ईरान और इराक के मसलों पर हमेशा से साजिशन नजर रखता है।
सऊदी अरब ने भी ईरान को धमकी दी। सऊदी अरब के विदेश राज्यमंत्री अदेल अल-जुबेर ने कहा कि हम युद्ध नहीं चाहते। हम इसकी कोशिश भी नहीं कर रहे, लेकिन अपनी रक्षा करने से पीछे नहीं हटेंगे। हम ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएंगे। ईरान से किसी भी स्थिति में निपटने के लिए सक्षम हैं।
ईरान हमें नहीं उकसाए। यह उसके लिए अच्छा नहीं होगा। दरअसल, पिछले सप्ताह यूएई तट के पास दो सऊदी जहाजों और दो तेल टैंकरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। किसी ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी, लेकिन अमेरिका का मानना है कि हमले के पीछे ईरान हो सकता है।
इसी महीने ट्रम्प की शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें कार्यकारी रक्षा मंत्री पैट्रिक शैनहन ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी सेना की योजना पेश की थी। अमेरिका मध्य-पूर्व में बड़ी संख्या में सैनिक भेजने को लेकर गंभीर है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका मध्य-पूर्व में 1.20 लाख सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। अमेरिका ने इतने ही सैनिक 2003 में इराक पर हमले के दौरान भेजे थे।