अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान ने फिर से अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की कोशिश की तो हम फिर उस पर हमला करेंगे। ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ खबरों में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी हमले में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से तबाह नहीं हुआ है। हालांकि, ट्रंप ने इस खबरों को फर्जी करार दिया है।
अमेरिका की रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमले में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से तबाह नहीं हुआ है। डीआईए की रिपोर्ट कथित तौर पर लीक हुई है और इस रिपोर्ट के हवाले से कुछ मीडिया चैनल्स ने ये खबरें चलाई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन खबरों को फर्जी करार दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखे एक पोस्ट में कहा कि खबरों में सैन्य इतिहास के सबसे सफल अभियान को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। ईरान के परमाणु केंद्र पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। व्हाइट हाउस ने भी खबरों को फर्जी करार दिया और दावा किया कि ये राष्ट्रपति ट्रंप को बदनाम करने की साजिश है।
ट्रंप ने दावा किया कि इस्राइल और ईरान के बीच 12 दिनों तक चले संघर्ष को समाप्त करने में अमेरिका की भूमिका अहम रही। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले करके अमेरिका ने वह संघर्ष खत्म कर दिया, जिसमें दोनों देशों के नागरिकों की जानें जा रही थीं और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंच रहा था। ट्रंप ने पिछले सप्ताह हुए इन हमलों की तुलना 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर किए गए परमाणु हमलों से की।
जब उनसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि ईरान ने इस 12‑दिन के संघर्ष के दौरान 'नर्क' झेला और इस वजह से उसने अपनी परमाणु हथियार बनाने की इच्छा को छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि वह फिर कभी ऐसा करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को तेल, मिसाइल और रक्षा हथियार मिलेंगे, लेकिन उन्होंने परमाणु हथियार बनाने की राह को पूरी तरह छोड़ दिया है।
ट्रंप ने कहा कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच संबंध ठीक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे हिरोशिमा और नागासाकी पर हमले ने युद्ध को खत्म कर दिया था, वैसे ही ये हमले इस संघर्ष को समाप्त करने में निर्णायक रहे।
हिरोशिमा और नागासाकी क्या हुआ था?
अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर दो परमाणु बम गिराए थे, जिनमें 2 लाख से अधिक लोग मारे गए थे। इसके बाद जापान ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया था और द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया। यह पहली बार था जब सैन्य संघर्ष में परमाणु हथियार इस्तेमाल किए गए थे। ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इन हमलों का सीमित ही असर हुआ। रिपोर्ट में पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) तक की राय बताई गई थी ।
इस्राइल-ईरान के बीच 12 दिन चला संघर्ष
इस्राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए थे और शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को भी मारने का आह्वान किया था, जिसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। ईरान ने कहा था कि वह केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम का संवर्धन कर रहा था। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए, जिससे यह संघर्ष 12 दिनों तक चला। पिछले सप्ताह ट्रंप ने ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान में परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले का आदेश दिया और बाद में कहा कि इसने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
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