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'मेरे रास्ते पर नहीं आया तो चीजें बहुत बुरी होंगी': ट्रंप की ईरान को खुली धमकी! कहा- 10 दिन में लेंगे फैसला

Thu, 19 Feb 2026 09:21 PM IST
राहुल कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।

सार

ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इशारों-इशारों में बड़ा बयान दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इशारा किया है कि वह अगले 10 दिनों में ईरान के खिलाफ संभावित हमले पर फैसला लेंगे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। - फोटो : एक्स- व्हाइट हाउस
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विस्तार
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत लगातार ईरान की ओर बढ़ रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को सीधी धमकी दी गई है। बोर्ड ऑफ पीस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ईरान के लिए हमारे साथ उस रास्ते पर चलने का समय है जो हम बना रहे हैं। अगर वह साथ नहीं आता है तो यह एक बहुत अलग रास्ता होगा।

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ईरान को ट्रंप की खुली धमकी
ट्रंप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अब ईरान के लिए हमारे साथ उस रास्ते पर चलने का समय है जो हम जो कर रहे हैं उसे पूरा करेगा और अगर वे हमारे साथ आते हैं, तो यह बहुत अच्छा होगा। अगर वे हमारे साथ नहीं आते हैं, तो भी यह बहुत अच्छा होगा। लेकिन यह एक बहुत अलग रास्ता होगा। वे पूरे इलाके की स्थिरता को खतरा नहीं पहुंचा सकते। उन्हें एक समझौता करना ही होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो फिर बुरी चीजें होंगी। 

डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को तेहरान पर निशाना साधते हुए कहा कि अब हमें इसे एक कदम आगे ले जाना पड़ सकता है, या शायद नहीं। शायद हम एक डील करने जा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ने आगे कहा, आपको अगले, शायद 10 दिनों में पता चल जाएगा। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। अगर उनके पास परमाणु हथियार हैं, तो आप मिडिल ईस्ट में शांति नहीं ला सकते। 
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ईरान पर, डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिक के साथ स्टीव विटकॉफ के डिप्लोमैटिक प्रयासों की तारीफ की। ट्रंप ने कहा, ईरान अभी एक हॉट स्पॉट है, उन्होंने कहा कि विटकॉफ और जेरेड कुशनर दोनों के ईरान के प्रतिनिधियों के साथ अच्छे रिश्ते हैं।ट्रंप ने कहा, "बातचीत सही दिशा में जा रही है। पिछले कुछ साल में यह साबित हुआ है कि ईरान के साथ डील करना आसान नहीं है। हमें एक अच्छी डील करनी होगी।"


 
बोर्ड ऑफ पीस पर संयुक्त राष्ट्र रखेगा नजर
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, अमेरिका बोर्ड ऑफ पीस को 10 बिलियन डॉलर का योगदान देने जा रहा है। हम संयुक्त राष्ट्र के साथ बहुत करीब से काम करने जा रहे हैं। हम उन्हें वापस लाएंगे। मैंने आठ युद्ध में से किसी एक के बारे में भी उनसे बात नहीं की और मुझे उन सभी के बारे में उनसे बात करनी चाहिए। एक दिन मैं यहां नहीं रहूंगा। मुझे लगता है कि संयुक्त राष्ट्र बहुत अधिक मजबूत होगा। बोर्ड ऑफ पीस लगभग संयुक्त राष्ट्र पर नजर रखेगा और यह तय करेगा कि यह ठीक से चले। हम संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करने जा रहे हैं। हम यह पक्का करेंगे कि इसकी सुविधाएं अच्छी हों, उन्हें मदद की जरूरत है और उन्हें पैसे के मामले में मदद की जरूरत है। हमें पैसे के मामले में उनकी मदद करनी है।

बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों ने 7 अरब अमेरिकी डॉलर देने पर जताई सहमति
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को शांति बोर्ड की पहली बैठक में घोषणा की कि बोर्ड के नौ सदस्यों ने गाजा राहत पैकेज के लिए 7 अरब अमेरिकी डॉलर देने का वादा करने पर सहमति व्यक्त की है। ट्रंप ने आगे कहा कि कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने सहमति जताई है। 

ट्रंप ने दानदाताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि खर्च किया गया हर डॉलर स्थिरता और एक नए और सामंजस्यपूर्ण क्षेत्र की उम्मीद में एक निवेश है। यह राशि दो वर्षों के युद्ध के बाद तबाह हुए फिलिस्तीनी क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक अनुमानित 70 अरब अमेरिकी डॉलर का एक छोटा सा हिस्सा है।



भारत ने पर्यवेक्षक देश के रूप में लिया भाग
भारत ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पर गठित शांति बोर्ड की उद्घाटन बैठक में एक 'पर्यवेक्षक' देश के रूप में भाग लिया। डोनाल्ड जे ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित बैठक में उपस्थित लोगों की सूची के अनुसार भारत का प्रतिनिधित्व वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स नामग्या खम्पा ने किया। याद रहे कि भारत उस शांति बोर्ड में शामिल नहीं हुआ है, जिसे ट्रंप ने गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए स्थापित किया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका इस बोर्ड के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर देगा, जिसके सदस्यों में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई जैसे 27 देश शामिल हैं।
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भारत उन देशों में से एक था, जो 22 जनवरी को दावोस में आयोजित एक समारोह में उपस्थित नहीं था, जहां ट्रंप ने शांति बोर्ड का अनावरण किया था, जिसका उद्देश्य गाजा में स्थायी शांति लाना और संभवतः अन्य वैश्विक संघर्षों को हल करना है। शांति बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता है। ट्रंप ने पहले कहा था कि शांति बोर्ड संयुक्त राष्ट्र की जगह ले सकता है, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह कभी भी अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाया है।

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