ट्रंप ने पुतिन से बातचीत में किस पेशकश का जिक्र किया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था अगर यूक्रेन को अपनी खोई हुई जमीन वापस चाहिए तो उसे रूस को कुछ जमीन देनी भी होगी।
ट्रंप ने कहा कि अगर व्लादिमीर पुतिन इस एवज में उन्हें कोई सही प्रस्ताव देते हैं तो वे यूरोपीय नेताओं को इसकी जानकारी देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पहले वह किसी भी प्रस्ताव के बारे में जेलेंस्की को बताएंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि यूक्रेन के लिए कोई भी समझौत करना उनका काम नहीं है। इसलिए पुतिन के किसी भी प्रस्ताव के बाद वे या तो उस पर सभी पक्षों को अपनी शुभकामनाएं देंगे या उन्हें लड़ते रहने को कहेंगे और या फिर किसी समझौते पर पहुंचने के लिए कहेंगे।
रूस संघर्ष विराम पर सहमत हुआ तो यूक्रेन को कौन सी जमीन छोड़नी पड़ सकती है?
अमेरिकी मीडिया की मानें तो व्हाइट हाउस लंबे समय से यूरोपीय नेताओं को इस बात पर सहमत करने की कोशिश कर रहा है कि वे उत्तरी यूक्रेन में मौजूद डोनबास क्षेत्र पर रूस के कब्जे को स्वीकार कर लें। साथ ही रूस 2014 में यूक्रेन से कब्जाए क्रीमिया क्षेत्र पर भी अपनी स्वायत्ता को मान्यता देने की मांग कर रहा है। अमेरिका इसे लेकर भी साथी देशों से चर्चा में जुटा है।
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रूस का लक्ष्य है कि वह डोनबास में आने वाले दो क्षेत्रों- डोनेत्स्क और लुहांस्क में अपनी पकड़ मजबूत कर ले। इसकी वजह यह है कि यूक्रेन के यह दोनों ही क्षेत्र औद्योगिक केंद्र कहे जाते रहे हैं। इतना ही नहीं इन क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधान भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। कुछ समय पहले खुद अमेरिका इन क्षेत्रों में मौजूद खनिज संसाधनों को लेकर यूक्रेन से समझौता करने पर विचार कर रहा था।
पुतिन, जो कि खुद सोवियत संघ के काल में केजीबी के एजेंट रहे हैं, वे कई मौकों पर कह चुके हैं कि वह रूस के प्रभाव का क्षेत्र पुरानी सोवियत सीमाओं तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने सोवियत शासन के पतन को 20वीं सदी की सबसे बड़ी त्रासदी तक करार दिया था।
इतना ही नहीं पुतिन अमेरिका और यूरोपीय देशों से यूक्रेन को नाटो और यूरोपीय संघ का सदस्य न बनाने की भी शर्त रख सकते हैं, ताकि वह क्षेत्र में अपने हितों की सुरक्षा कर सकें। अगर पश्चिमी देश यूक्रेन को लेकर इन शर्तों को मान जाते हैं तो यह स्पष्ट तौर पर रूस की बड़ी जीत के तौर पर देखा जाएगा। दरअसल, समझौते के जरिए पुतिन न सिर्फ यूक्रेन का एक बड़ा हिस्सा मिल जाएगा, बल्कि उसके कब्जों को भी मान्यता मिलने की राह आसान हो जाएगी, जो कि उसके लिए आर्थिक तौर पर फायदे का सौदा होगा।
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यूक्रेन और यूरोप का ट्रंप-पुतिन की बैठक और इन शर्तों पर क्या कहना है?
रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम के लक्ष्य को लेकर होने वाली इस बैठक और रूस की तरफ से इससे जुड़ी शर्तों को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की खुलेआम विरोध में हैं। वहीं, यूरोपीय संघ ने भी बिना यूक्रेन की मौजूदगी के ऐसे किसी समझौते की संभावना से इनकार किया है।
यूक्रेन की शांति का रास्ता बिना यूक्रेन के नहीं निकल सकता। हम इस बात को लेकर प्रतिबद्ध हैं कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बलपूर्वक न बदला जाए। मौजूदा समय में जहां संघर्ष छिड़ा है, उन्हें लेकर सबसे पहले बातचीत होनी चाहिए।
- फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड, ब्रिटेन, इटली, फिनलैंड और यूरोपीय आयोग का साझा बयान
उधर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की खुद कह चुके हैं कि हमारे बिना कोई भी फैसला एक मृत निर्णय होगा। वे बिल्कुल काम नहीं करेगा। इनसे कुछ भी नहीं होगा। जेलेंस्की ने यह भी कहा है कि पुतिन सिर्फ अमेरिका को फुसलाने के लिए इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं।
हालांकि, पर्दे के पीछे अमेरिका की तरफ से यूक्रेन से जो बातचीत की जा रही है, उसके मुताबिक अगर पुतिन-ट्रंप के बीच संघर्ष विराम को लेकर कोई समझौता होता है तो कीव इसमें अपने लिए पश्चिमी देशों से सुरक्षा गारंटी की उम्मीद करेगा। साथ ही आगे रूस के साथ क्षेत्र में एक बफर जोन बनाने की भी मांग करेगा, जिससे यूरोप-अमेरिका समय पर उसकी सुरक्षा के लिए कदम उठा सकें।