Donald Trump: अमेरिका अब जब्त ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल खाड़ी देशों में युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए करने की तैयारी में है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान क्षेत्रीय हमलों की आर्थिक कीमत चुकाए। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी और ईरानी सैन्य कार्रवाई से तनाव और बढ़ गया है। कुवैत, बहरीन और लेबनान तक संघर्ष फैलने से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग अब उन ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है, जिन्हें प्रतिबंधों के तहत जब्त किया गया था। इन पैसों से खाड़ी देशों में युद्ध और हमलों से हुए नुकसान की भरपाई करने की योजना बनाई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने हमलों से हुए नुकसान की आर्थिक कीमत भी चुकाए। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर लेबनान तक हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं।
क्या है अमेरिका की नई योजना?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की योजना है कि जब्त ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल खाड़ी देशों के पुनर्निर्माण में किया जाए। इसमें सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं, जिन्हें हाल के महीनों में ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि खाड़ी देशों से यह आकलन लिया जाए कि युद्ध में हुए नुकसान की मरम्मत के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी। इसके बाद यह देखा जाएगा कि जब्त ईरानी संपत्तियों को कानूनी रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं।
किन संपत्तियों पर अमेरिका की नजर है?
अमेरिका अभी यह तय नहीं कर पाया है कि किन संपत्तियों का उपयोग किया जाएगा। इसमें विदेशी बैंकों में जमा ईरानी फंड, तेल टैंकर और अन्य संपत्तियां शामिल हो सकती हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान को क्षेत्रीय हिंसा और अस्थिरता की कीमत चुकानी चाहिए।
दूसरी तरफ ईरान लगातार कह रहा है कि किसी भी समझौते से पहले उसके अरबों डॉलर के फंड को जारी किया जाए और प्रतिबंध हटाए जाएं। बताया जा रहा है कि ईरान करीब 24 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को छुड़ाने की मांग कर रहा है।
होर्मुज में फिर क्यों बढ़ा तनाव?
तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी सेना ने शनिवार तड़के ईरान के गोरोख और क़ेश्म द्वीप स्थित रडार ठिकानों पर हमला किया। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बने ईरानी ड्रोन को रोकने के लिए की गई।
इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल दाग दीं। कुवैत के अनुसार सात बैलिस्टिक मिसाइल आबादी वाले इलाकों के ऊपर से गुजरीं, जिससे कुछ इमारतों को नुकसान हुआ। हालांकि किसी की मौत नहीं हुई। बहरीन में भी सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया।
युद्धविराम के बावजूद क्यों नहीं थम रही लड़ाई?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीन पर हालात सुधरते नहीं दिख रहे। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक प्रतिबंध नहीं हटते और उसकी संपत्तियां जारी नहीं होतीं, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।
उधर इस्राइल और हिज्बुल्लाह के बीच भी संघर्ष जारी है। लेबनान में हाल ही में इस्राइली हमले में तीन लेबनानी सैनिक मारे गए। ईरान चाहता है कि इस्राइल-हिज्बुल्लाह मोर्चे पर भी पूर्ण युद्धविराम हो, जबकि इस्राइल सैन्य कार्रवाई जारी रखने के संकेत दे रहा है।