अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने बाजी मार ली है। हालांकि ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी कमला हैरिस के बीच कड़ा मुकाबला रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की जीत से भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते कैसे होंगे, इस मुद्दे पर अमर उजाला डॉट कॉम ने कई दशकों तक शिकागो में रहे डॉक्टर मनीष रायजादा से बातचीत की है।
अमेरिका की राजनीति एवं दूसरे मुद्दों पर गहरी नजर रखने वाले रायजादा कहते हैं, देखिये एक बात तो साफ है कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच शानदार केमिस्ट्री रही है। कई मुद्दों पर ये दोनों नेता, एक साझा समझ रखते हैं। बड़ी बात यह है कि ड्रैगन यानी 'चीन' के खिलाफ कठोर स्टैंड रखने वाले ट्रंप, अब मेक्सिको के जरिए अमेरिका में अवैध एंट्री करने वालों पर शिकंजा कसेंगे। संभव है कि वे मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार खड़ी करने का काम पूरा करेंगे। निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में दीवार का काम अधूरा रह गया था। मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने का प्लान ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान तैयार किया था।
डॉ. रायजादा के मुताबिक, इसमें कोई शक नहीं है कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन के खिलाफ एंटी इन्कमबेंसी थी। इस चुनाव के नतीजों ने यह बात भी साफ कर दी है कि वर्तमान हालातों में अमेरिका के लोग, महिला राष्ट्रपति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं, जिन्होंने चीन को लेकर अपने कठोर व्यवहार का परिचय दिया था। जिस तरह के तेवर ट्रंप ने ड्रैगन को दिखाए, वैसे निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन नहीं दिखा पाए। मोदी और ट्रंप के बीच बेहतर समझ रही है। अभी तक आउट डोर मैसेज यही है कि ये दोनों नेता, विश्व के लिए एक साथ मिलकर अच्छा काम करेंगे।
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप, चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ रहे हैं। साल 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद, दोनों मुल्कों के संबंध खराब हो गए थे। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार और बातचीत जारी रही। पिछले दिनों एलएसी पर दोनों देशों ने अपने सैनिकों को पीछे हटाया है। डॉ. मनीष रायजादा ने कहा, ट्रंप के आने के बाद सीमा सहित कई मसलों पर चीन अपनी ज्यादा दादागिरी नहीं दिखा सकेगा। इसका फायदा भारत को मिल सकता है। ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि वे रूस और यूक्रेन के बीच जारी लड़ाई को 24 घंटे में खत्म करा देंगे। इस बयान के पीछे एक बड़ी वजह यह बताई गई है कि जो बाइडेन के कार्यकाल में अमेरिका के लोगों के टैक्स मनी का पैसा, यूक्रेन में जा रहा था। इसे लेकर वहां के लोगों में नाराजगी थी।
अमेरिका में महंगाई भी लगातार बढ़ रही है। हालांकि चुनाव प्रचार में महंगाई को लेकर ट्रंप और कमला हैरिस, दोनों नेताओं ने इसे कम करने का वादा किया था। अवैध प्रवासियों की समस्या को लेकर ट्रंप ज्यादा आक्रामक दिखाई पड़ते हैं। इन पर भी अमेरिका का काफी पैसा खर्च होता है। महंगाई बढ़ने के पीछे यह भी एक बड़ा कारण है। इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रंप कह चुके हैं कि मैं इजरायल के साथ खड़ा हूं। भारतीय विदेश नीति के लिए ट्रंप बेहतर समझ रखते हैं, ऐसी उम्मीद की जा रही है। ट्रंप को बिजनेस और सामान्य क्लास के बीच सामंजस्य बैठाना होगा।
केपिटल हिल का दंगा, जिसमें ट्रंप को आरोपी बनाया गया था, उसका असर चुनाव में नहीं दिखा। इसके बावजूद लोगों ने ट्रंप का साथ दिया। रेड स्टेट, जिसे 'बाइबल बेल्ट' भी कहा जाता है, उसमें रिपब्लिकन का ज्यादा जोर रहता है। वहां के लोगों का जो माइंडसेट था, वह बदला नहीं। ट्रंप को इसका जबरदस्त फायदा मिला है। यहां तक कि स्विंग स्टेट से मिलने वाले वोटों में भी ट्रंप ने सेंध लगाई है। नॉर्थ कैरोलाइना, जॉर्जिया और पेंसिलवेनिया में भी रिपब्लिकन ने जबरदस्त जीत हासिल की है।