अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर व्हाइट हाउस से वर्गीकृत दस्तावेज अपने घर ले जाने के मामले में अभियोग लगा दिया गया है। यह पहला मौका है जब किसी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति पर आपराधिक मामले में अभियोग लगाया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है, जब अमेरिका में अगले राष्ट्रपति चुनाव का माहौल गरमाने लगा है और ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी पाने की होड़ में काफी आगे चल रहे हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर जानकारी दी कि उन्हें मयामी स्थित फेडरल कोर्ट में अगले मंगलवार को पेश होने को कहा गया है। ट्रंप ने न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज को बताया कि वे कोर्ट में अपने को निर्दोष बताएंगे और यह मुकदमा लड़ेंगे। ट्रंप ने कहा- ‘भ्रष्ट बाइडन प्रशासन ने मेरे वकीलों को सूचित किया है कि मुझ पर अभियोग लगा दिया गया है।’
पिछले साल अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो (एफबीआई) ने इस मामले में फ्लोरिडा स्थित ट्रंप के निवास मार-ए-लेगो पर छापा मारा था। तब एफबीआई ने दावा किया था कि उसे वहां 100 क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट मिले हैं। विश्लेषकों ने कहा है कि अभियोग लगने के बावजूद ट्रंप की लोकप्रियता पर कोई फर्क पड़ने की संभावना नहीं है। अभी भी ज्यादा संभावना यही है कि 2024 के चुनाव के लिए वे रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार चुन लिए जाएंगे। लेकिन ताजा घटनाक्रम से चुनाव प्रचार के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के लिए कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर वोट मांगना मुश्किल हो जाएगा।
रिपब्लिकन पार्टी ने पिछले लगभग पांच दशकों से कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाने वाली पार्टी की छवि बना रखी है। ट्रंप पर कानून-व्यवस्था का आदर न करने का आरोप उनकी पार्टी के भीतर कई वे नेता भी लगा रहे हैं, जो राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की होड़ में कूदे हैं। इनमें सबसे प्रमुख पूर्व राष्ट्रपति माइक पेंस भी हैं। पेंस ने छह जनवरी 2021 की घटना को लेकर ट्रंप पर निशाना साधा है और दावा किया है कि उस रोज बतौर उप राष्ट्रपति वे अमेरिकी संविधान के प्रति वफादार रहे। उस रोज ट्रंप समर्थक भीड़ ने कैपिटॉल हिल (संसद भवन) पर धावा बोल दिया था।
विश्लेषकों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच ऐसे आरोपों से कोई ट्रंप की लोकप्रियता पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अभी तक जो नेता होड़ में उतरे हैं, वे सभी कभी ना कभी ट्रंप के समर्थक रह चुके हैं। पेंस चार साल तक ट्रंप प्रशासन में उप राष्ट्रपति रहे। फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस को ट्रंप का ही शिष्य माना जाता रहा है। इसी निकी हेली ट्रंप प्रशासन की तरफ से संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की दूत थीं।
पर्यवेक्षकों ने कहा है कि इन वजहों से रिपब्लिकन पार्टी की प्राइमरी (उम्मीदवार चुनने के चुनाव) में ट्रंप की जीत की संभावना प्रबल बनी रहेगी। लेकिन ताजा अभियोग लगने से चुनाव अभियान में डेमोक्रेटिक पार्टी को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी को घेरने का मौका मिलेगा। वैसे टीवी चैनल सीएनएन ने एक विश्लेषण में कहा है कि अमेरिकी राजनीति में तीखा ध्रुवीकरण है और इसके बीच गंभीर मुद्दे चुनाव नतीजों को प्रभावित नहीं कर पा रहे हैं।