अमेरिका ने बौद्धिक संपदा सुरक्षा के मामले में निगरानी के लिए एक प्राथमिक सूची तैयार की है। इस सूची में उसने भारत को भी रखा है। अमेरिका ने यह कदम भारत के बौद्धिक संपदा अधिकार की संरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी कुछ पुरानी और कुछ नई आपत्तियों के बाद उठाया है।
इस संबंध में अमेरिका का कहना है कि भारत ने कुछ लंबे समय से चली आ रही और कुछ नई चुनौतियों के मामले में अपने नियम कायदे नहीं बदले हैं। इनकी वजह से अमेरिकी कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकार पर वर्षों से बुरा प्रभाव पड़ा है।
बता दें कि अमेरिका ने भारत और चीन सहित अपने प्रमुख व्यापार भागीदार सहित 10 देशों को इस सूची में रखा है। उसका आरोप है कि इन देशों में बौद्धिक संपदा अधिकारों को लागू करने में कमियां आई हैं। कारण कि उनके नियम कानून अब भी अपर्याप्त हैं। अमेरिका की जो भी कंपनियां अथवा इन अधिकारों के धारक इन देशों के नियमों पर निर्भर हैं, उन्हें वहां बाजार में काम करने में समानता का अवसर नहीं मिलता।
ट्रंप प्रशासन के तहत जिन देशों को बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े मामलों से जुड़ी निगरानी सूची में रखा गया है, उनमें अल्जीरिया, अर्जेंटीना, चिली, चीन, भारत, इंडोनेशिया, रूस, सऊदी अरब, यूक्रेन और वेनेजुएला शामिल हैं।
बता दें कि कुवैत को पिछले साल ऐसी सूची से हटा लिया गया था। इसमें 11 देश शामिल थे। वर्ष 2019 में अमेरिका ने कनाडा और थाइलैंड को इस सूची से हटाया था।