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रूस पर ट्रंप ने रोके प्रतिबंध: अमेरिका में ही मचने लगा हो-हल्ला, यूरोप ने भी दिखाए तेवर; क्या है पूरा मामला?

Sun, 18 Oct 2026 10:21 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, वाशिंगटन।

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और भारत जैसे देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले 'ग्राहम एक्ट' के क्रियान्वयन को 60 दिनों के लिए टाल दिया है। अमेरिका का तर्क है कि यूरोप खुद रूस से भारी मात्रा में ईंधन खरीद रहा है और उसने भारत-चीन पर शिकंजा कसने से इनकार कर दिया है, ऐसे में अमेरिका अकेले वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में नहीं डाल सकता। हालांकि, अमेरिकी संसद में ट्रंप के इस कदम की चौतरफा आलोचना हो रही है और सांसद इसे रूस के सामने ढीले पड़ने का संकेत मान रहे हैं।
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रूस पर मेहरबान ट्रंप! - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका ने हाल ही में रूस और भारत समेत कई देशों पर लगने वाले प्रतिबंधों और टैरिफ को 60 दिनों के लिए टाल दिया है। वॉशिंगटन की तरफ से आए इस फैसले पर अमेरिका के भीतर ही काफी हो-हल्ला मच रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कोई राहत नहीं है, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह समझने के लिए दो महीने का वक्त लिया गया है।
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यूरोप पर भड़का अमेरिका, कहा- हम ही क्यों सहें नुकसान?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा कि शुक्रवार को कोई भी प्रतिबंध हटाया नहीं गया है, सिर्फ उन पर 60 दिनों की रोक लगाई गई है। बेसेंट ने खुलासा किया कि अमेरिका ने यूरोपीय देशों से कहा था कि वे भारत और चीन पर रूस से तेल खरीदने की वजह से कड़े नियम (सेकेंडरी सैंक्शंस) लगाएं, लेकिन यूरोप ने साफ मना कर दिया। बेसेंट ने सवाल उठाया कि जब यूरोपीय देश खुद रूस से डीजल, जेट फ्यूल और खाद खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं, तो अकेला अमेरिका क्यों नुकसान उठाए?

मार्को रुबियो की सफाई
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और उज्बेकिस्तान के दौरे पर रवाना होने से पहले इस पर अमेरिका का रुख रखा। उन्होंने बताया कि इस कानून में छूट देने का प्रावधान इसलिए रखा गया था, जिससे दुनिया भर में जारी संकटों का जायजा लिया जा सके। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध, सऊदी अरब में हूतियों के हमले और रूस-यूक्रेन जंग के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पहले से ही दबाव में है। ऐसे में अचानक प्रतिबंध और टैरिफ थोपने से दुनिया और अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना बेहद जरूरी है।
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देश और दुनिया के हक में लिया गया फैसला- ट्रंप
फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके इस कदम से अमेरिका को ही फायदा होगा। ट्रंप ने कहा, 'बहुत से लोग अभी मेरे फैसले की गहराई को नहीं समझ पा रहे हैं, लेकिन यह फैसला हमारे देश के लिए और दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए बहुत बढ़िया साबित होगा।'
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अमेरिकी संसद में बवाल, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों नाराज
ट्रंप सरकार के इस कदम से अमेरिकी राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट' नाम का यह सख्त कानून पिछले महीने ही भारी समर्थन के साथ पास हुआ था। अब सरकार द्वारा इसे टालने पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों दल के नेता भड़के हुए हैं। साउथ कैरोलिना से रिपब्लिकन सांसद डार्लीन ग्राहम ने भी ट्रंप की आलोचना की है। वहीं अमी बेरा और सुहास सुब्रमण्यम जैसे भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने कहा कि ट्रंप का यह फैसला संसद के अधिकारों को कमजोर करता है और रूस के प्रति ढिलाई बरतता है।
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