रणनीतिक महत्व रखने वाले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में भारत की भूमिका बढ़ाने के लिए अमेरिका साझेदारी करेगा। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के अनुसार भारत हिंद महासागर में पहले ही सुरक्षा मुहैया करवा रहा प्रमुख देश है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए भारत भी रक्षा आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है।
नौसैनिक सहयोग पर जोर
सैन्य कार्रवाइयों के परिपेक्ष्य में ज्यादा जोर नौसैनिक सहयोग पर दिया जा रहा है। पिछले साल 2 प्लस 2 वार्ता में इस पर चर्चा हुई और परिणाम चार्ल्स ड्रू जहाज को यात्रा के बीच के रिपेयर के लिए चेन्नई में रोकने के रूप में नजर आया।
भारत का विश्वसनीय साझेदार बनना है हमें
पेंटागन अधिकारी ने कहा कि भारत का विश्वसनीय साझेदार बनना अमेरिका की प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए भारत की रक्षा जरूरतों में जहां भी संभव हो, अमेरिका सहयोग दे रहा है।
रणनीतिक साझेदारी हुई मजबूत : संधू
अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साथ आने से दोनों देशों के संबंधों को दृढ़ता और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच लगातार संवाद भी हो रहा है, जो संबंधों को दिशा दे रहा है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय व नागरिक मामलात संकुल में शनिवार को हुई कॉन्फ्रेंस ‘इंडिया एट 75’ में संधू मुख्य वक्तव्य दे रहे थे।
संधू ने कहा कि राजनीतिक ही नहीं, नागरिक संबंध, कारोबार, अध्ययन, शोधार्थियों के बीच संपर्क से भी इस सहयोग की बुनियाद मजबूत बनेगी। दोनों देशों के संबंध स्केल, स्पीड और स्किल से परिभाषित हो रहे हैं। स्केल का उदाहरण रोटावायरस के 1 डॉलर में मिल रहे रोटावैक टीके में है, जो पहले 60 डॉलर का था।
अहम रणनीतिक साझेदारियों में दोनों देश
क्वाड : लंबे समय से प्रस्तावित क्वाड का गठन भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया व जापान ने नवंबर 2017 में किया। चीन की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच इसका लक्ष्य नई रणनीति बनाकर अहम सामुद्रिक मार्गों को किसी के प्रभाव से मुक्त रखना है। चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, इनमें ताइवान, फिलीपींस, ब्रूनेई, मलयशिया, वियतनाम के दावे वाले क्षेत्र भी हैं। चीन ने कृत्रिम द्वीप तक बना दिए ताकि अपने सैन्य केंद्र स्थापित कर सके। पूर्वी चीन सागर में उसके क्षेत्र को लेकर जापान के साथ विवाद हैं।
आईपीईएफ : इसे 23 मई को भारत व अमेरिका सहित हिंद-प्रशांत के 14 देशों ने शुरू किया। बाकी देश ऑस्ट्रेलिया, ब्रूनेई, फिजी, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलयशिया, न्यूजीलैंड, फिलिपींस, सिंगापुर, थाईलैंड व वियतनाम हैं। इसका लक्ष्य आर्थिक साझेदारी बढ़ाना है।
आई2यू2 : भारत, इस्राइल, यूएई व अमेरिका ने अक्तूबर 2021 में यह समूह बनाया। लक्ष्य चारों देशों के कॉरपोरेट जगत को साथ लाना, निवेश बढ़ाना व जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा के लिए नई पहल करना है।