अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में बर्खास्त डैरेन बीटी को अमेरिका की शांति संस्था यूएसआईपी का अध्यक्ष बनाया गया है। बीटी के विवादित बयानों और पुराने संबंधों को लेकर मामला गरमा गया है। ट्रंप पहले ही इस संस्था को बंद करने की कोशिश कर चुके हैं। कोर्ट ने संस्था के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन अपील कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी। अब मामला दोबारा कोर्ट में है।
अमेरिका में एक बार फिर से शांति से जुड़ी एक संस्था को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में बर्खास्त किए गए डैरेन बीटी को अब अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (यूएसआईपी) का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस संस्था की स्थापना दुनिया में शांति को बढ़ावा देने और संघर्ष खत्म करने के उद्देश्य से की गई थी। लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा इस संस्था को खत्म करने की कोशिशें पहले से ही विवादों में रही हैं। अब बीटी की नियुक्ति को लेकर मामला और भड़क गया है।
विज्ञापन
डैरेन बीटी एक पूर्व प्रोफेसर और वर्तमान में स्टेट डिपार्टमेंट में पब्लिक डिप्लोमेसी के अंडर सेक्रेटरी हैं। उन्हें 2018 में उस समय ट्रंप प्रशासन से निकाल दिया गया था, जब सामने आया कि उन्होंने 2016 में एक ऐसे कॉन्फ्रेंस में भाषण दिया था जिसमें श्वेत नस्लवादी भी शामिल थे। इसके बावजूद अब उन्हें USIP का प्रमुख बना दिया गया है। बीटी पर जनवरी 6 के कैपिटल हिल हमले को लेकर साजिशें फैलाने वाली वेबसाइट से भी जुड़ाव रहा है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं और अल्पसंख्यकों को लेकर कई भड़काऊ बयान सोशल मीडिया पर दिए हैं।
इस संस्था को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति पहले दिन से ही आलोचना के घेरे में रही है। फरवरी में ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर इस संस्था समेत चार स्वतंत्र एजेंसियों को बंद करने की योजना पेश की थी। इसके तहत एक नया विभाग डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) बनाया गया, जिसकी कमान तकनीकी अरबपति एलन मस्क को दी गई थी। इस विभाग ने जबरन संस्था का मुख्यालय कब्जे में लेने की कोशिश भी की थी।
विज्ञापन
कोर्ट से मिली थी संस्था को राहत
जब संस्था के सैकड़ों कर्मचारियों को एक साथ हटा दिया गया, तब संस्था ने कोर्ट का रुख किया। जिला अदालत की जज बेरिल ए. हॉवेल ने ट्रंप के फैसले को गैरकानूनी ठहराया और कहा कि ट्रंप को संस्था के बोर्ड और कार्यकारी अध्यक्ष को हटाने का अधिकार नहीं था। इसके बाद संस्था को मुख्यालय वापस मिल गया और कुछ कर्मचारियों को वापस बुला लिया गया। हालांकि, कई लोग नहीं लौटे क्योंकि संचालन दोबारा शुरू करना आसान नहीं था।
फिर से उलझा मामला, अपील कोर्ट का स्टे
इस फैसले के खिलाफ सरकार ने अपील की और अपील कोर्ट ने मई में जज हॉवेल के आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद संस्था को दोबारा मुख्यालय सरकार को सौंपना पड़ा और फिर से कर्मचारियों को टर्मिनेशन ऑर्डर थमा दिए गए। जून में अपील कोर्ट की तीन-जजों की बेंच ने संस्था की पूरी कोर्ट में सुनवाई की मांग को भी खारिज कर दिया।
पूर्व वकील ने नियुक्ति को बताया अवैध
यूएसआईपी के पूर्व कानूनी सलाहकार जॉर्ज फूट ने बीटी की नियुक्ति को ट्रंप प्रशासन की शांति की सोच के खिलाफ बताया है। उन्होंने इसे जज हॉवेल के 19 मई के आदेश के खिलाफ बताया और इसे गैरकानूनी करार दिया। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति संस्था के मूल्यों और अमेरिका की वैश्विक भागीदारियों की भावना का उल्लंघन है। संस्था की ओर से उन्होंने अपील अदालत में मामले की लड़ाई जारी रखने की बात कही है और कहा है कि वे फिर से संस्था को बहाल कराने में सफल होंगे।