अमेरिकी नौसेना ने अपने सबसे हाई-टेक और महंगे युद्धपोत फोर्ड-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर की डिजाइन और लागत की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। इस कदम ने इन आधुनिक विमानवाहक पोतों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नौसेना सचिव जॉन फेलन ने साफ किया कि यह समीक्षा व्यावहारिक और जरूरी है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इन जहाजों पर खर्च और तकनीक भविष्य की जरूरतों के अनुरूप है या नहीं।
रद्द भी हो सकते हैं भविष्य के कैरियर
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस समीक्षा के बाद फोर्ड-क्लास के भविष्य के जहाज रद्द हो सकते हैं, तो उन्होंने सीधे इंकार नहीं किया। उन्होंने कहा 'अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन विमानवाहक पोत हमारी रणनीति का अहम हिस्सा बने रहेंगे।'
ये भी पढ़ें:- संयुक्त राष्ट्र का भरोसा: वैश्विक संकट के बावजूद भारत की स्थिति मजबूत, इस साल 6.4 फीसदी रहेगी आर्थिक वृद्धि दर
ट्रंप की आलोचना भी बनी वजह
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से इन जहाजों की तकनीक, खासकर मैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम (EMALS) की आलोचना करते रहे हैं। उनका दावा था कि यह तकनीक भरोसेमंद नहीं है।
रिकॉर्ड तैनाती के बावजूद सवाल
दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड जून 2025 से 300 दिनों से अधिक समय तक तैनात रहा और कई अहम सैन्य अभियानों में शामिल हुआ। हालांकि, इतनी लंबी तैनाती के दौरान तकनीकी और संचालन से जुड़े कुछ मुद्दे भी सामने आए, जिससे इसकी क्षमता और लागत को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में जारी अमेरिकी नौसेना के बजट दस्तावेजों में फोर्ड-क्लास का नाम स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया, बल्कि सिर्फ एयरक्राफ्ट कैरियर लिखा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य की खरीद रणनीति में बदलाव संभव है।
तकनीक में क्या है खास?
फोर्ड-क्लास कैरियर में कई आधुनिक तकनीकें शामिल हैं:
- मैग्नेटिक कैटापल्ट से तेज विमान लॉन्च
- कम मेंटेनेंस और कम स्टाफ की जरूरत
- ज्यादा युद्ध क्षमता और तेज ऑपरेशन
लेकिन अब इन्हीं तकनीकों की लागत और वास्तविक प्रदर्शन की दोबारा जांच की जा रही है।
निर्माणाधीन और प्रस्तावित युद्धपोत
अमेरिकी नौसेना के फोर्ड-क्लास के तहत इस समय तीन और विमानवाहक पोत निर्माणाधीन हैं- यूएसएस जॉन एफ. केनेडी, यूएसएस एंटरप्राइज और यूएसएस डोरिस मिलर। इसके साथ ही दो अतिरिक्त जहाजों की योजना भी तैयार की जा चुकी है, लेकिन अभी तक उनके निर्माण के लिए कोई औपचारिक अनुबंध नहीं किया गया है, जिससे इनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।