रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन।
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना के आक्रामक रवैये पर पहली बार बयान दिया है। उन्होंने मॉस्को में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान से पांच घंटे तक बैठक के बाद एक न्यूज कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और रूस-यूक्रेन तनाव पर बात की। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच विवाद और इसके बढ़ने के कारण भी बताए।
यूक्रेन को लेकर क्या है रूस की मांग?
पुतिन ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पश्चिमी देशों ने रूस की उन मांगों को नजरअंदाज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका-नाटो गठबंधन यूक्रेन और अन्य पूर्व-सोवियत देशों तक अपना विस्तार नहीं करेगा और रूस की सीमा के नजदीक आक्रामक हथियार तैनात नहीं करेगा। यानी रूस सीधे तौर पर अमेरिका और नाटो से गारंटी मांग रहा है कि यूक्रेन कभी भी नाटो में शामिल नहीं होगा। इसके अलावा वह यूक्रेन सीमा पर जुटे नाटो सुरक्षाबलों के पूर्वी यूरोप से वापस लौटने की मांग पर भी अड़ा है। वहीं, अमेरिका और नाटो को लगता है कि रूस यूक्रेन पर हमला करने का मौका ढूंढ रहा है।
पश्चिमी देशों को ठहराया तनाव बढ़ने का जिम्मेदार
पुतिन ने स्पष्ट कहा कि यूक्रेन से रूस के तनाव की वजह अमेरिका और उसके सहयोगी देश हैं, जिन्होंने रूस की प्रमुख सुरक्षा मांगों की अनदेखी की है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि क्रेमलिन (रूस का रक्षा मंत्रालय) अभी भी सुरक्षा मांगों पर अमेरिका और नाटो के जवाब का अध्ययन कर रहा है, जो उन्हें पिछले सप्ताह मिला था। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह तनाव कम करने के लिए और भी बातचीत करने को तैयार हैं।
इससे पहले रूसी अधिकारियों ने मंगलवार को उन खबरों का खंडन किया था, जिनमें कहा गया था कि मॉस्को ने यूक्रेन संकट को कम करने से जुड़े अमेरिकी प्रस्ताव पर वॉशिंगटन को जवाब भेजा है। सोमवार को सुरक्षा परिषद में दोनों देशों के बीच तीखे-आरोप प्रत्यारोप देखने को मिले थे। वहीं, इस सिलसिले में रूस की राजधानी मॉस्को और यूक्रेन की राजधानी कीव में बैठकों का दौर जारी है।