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सलमान रुश्दी हमला मामला: अमेरिकी अदालत ने हादी मातार को आतंकवाद के आरोपों में दोषी ठहराया, क्या है पूरा केस?

Thu, 30 Jul 2026 08:03 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, वाशिंगटन।

सार

लेखक सलमान रुश्दी पर 2022 में हुए चाकू हमले के मामले में अमेरिकी अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। हमलावर को आतंकवादी के आरोपों में दोषी ठहराया गया है। हमले के पीछे क्या तैयारी थी, जांच में कौन-कौन से सबूत मिले और अब आरोपी को कितनी सजा हो सकती है, जानिए इस रिपोर्ट में।
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हादी मातार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
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अमेरिका की एक अदालत ने वर्ष 2022 में न्यूयॉर्क में लेखक सलमान रुश्दी पर चाकू से हमला करने के मामले में एक अमेरिकी नागरिक को संघीय आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया है। बफेलो (न्यूयॉर्क)  की एक संघीय जूरी ने बुधवार को न्यू जर्सी के फेयरव्यू निवासी हादी मातार को दोषी करार दिया। उसे प्रतिबंधित विदेशी आतंकवादी संगठन हिजबुल्ला को मदद देने की कोशिश करने, अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े आतंकवादी कृत्य में शामिल होने और आतंकवादियों को सहायता देने के आरोपों में दोषी पाया गया।
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अमेरिकी अटॉर्नी माइकल डीजियाकोमो ने क्या कहा?
  • न्यूयॉर्क के पश्चिमी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी माइकल डीजियाकोमो ने कहा कि अमेरिका में जन्मे और पले-बढ़े हादी मातार (28 वर्षीय) ने अपने मूल्यों को ईरान के नेताओं की उस आतंकवादी सोच के साथ जोड़ लिया, जो अक्सर हिंसा और इस मामले में हत्या की अपील करते हैं। 
  • डीजियाकोमो ने कहा कि मातार ने कई महीनों तक सलमान रुश्दी की हत्या की योजना बनाई और उसकी तैयारी की।
  • उन्होंने कहा कि वह उन लोगों जैसा बनना चाहता था, जिन्हें वह शहीद मानता था। लेकिन उसका आतंकवादी हमला सफल नहीं हुआ।
  • उन्होंने कहा कि आम लोगों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की बहादुरी की वजह से सलमान रुश्दी बच गए और मातार को पकड़ लिया गया।

12 अगस्त 2022 को मातार ने सलमान रुश्दी की हत्या करने की कोशिश की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने यह हमला 1988 में प्रकाशित रुश्दी के उपन्यास 'सैटेनिक वर्सेज' को लेकर जारी किए गए फतवे को पूरा करने के मकसद से किया था।
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राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग और एफबीआई ने क्या कहा?
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए. आइजनबर्ग ने कहा, मातार ने एक साल से अधिक समय तक हिजबुल्ला की हिंसक विचारधारा को अपनाया। ईरान के अयातुल्लाओं की ओर से जारी उस फतवे को लागू करने की तैयारी की, जिसमें रुश्दी की हत्या की बात कही गई थी। 

उन्होंने कहा, शांतिपूर्ण कार्यक्रम के दौरान रुश्दी पर उसका हमला यह दिखाता है कि ईरानी आतंकवाद का असर दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंचता है। आज के फैसले के साथ न्याय हुआ है। मातार को अपने अपराधों की सजा मिलेगी। 

एफबीआई के आतंकवाद-रोधी विभाग के सहायक निदेशक जरोड ब्राउन ने कहा, यह कोई अचानक किया गया हमला नहीं था। मातार ने एक प्रतिबंधित विदेशी आतंकवादी संगठन के समर्थन में हिंसक हमला किया। वह पीड़ित के खिलाफ जारी फतवे को लागू करना चाहता था। 

उन्होंने कहा, आज के फैसले के बाद इस हमलावर को आतंकवाद में शामिल होने की कीमत चुकानी होगी। एफबीआई और उसके सहयोगी आतंकवादियों और उनका साथ देने वालों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  

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जांच में क्या-क्या सबूत मिले?
सरकार की ओर से अदालत में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, मातार ने हमला करने का फैसला लेने से पहले एक साल से अधिक समय तक फतवे और उसकी वैधता पर शोध किया। उसने यह हमला उस समय करने की योजना बनाई, जब सलमान रुश्दी न्यूयॉर्क के मेविल स्थित चौटाउक्वा इंस्टीट्यूशन में भाषण दे रहे थे। 

हमले से पहले मातार ने ईरान, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में मौजूद कुछ लोगों के साथ फतवे और हिजबुल्ला के उसके समर्थन पर चर्चा भी की थी। उसने फतवे पर कई वीडियो भी बनाए थे। इनमें 'रुश्दी पतवा 2.0' और 'रुश्दी फतवा 6.0' जैसे शीर्षक शामिल थे। 

हमले की तैयारी कैसे की गई थी?
  • हादी मातार चौटाउक्वा इंस्टीट्यूशन 'हसन मुगनियेह' नाम का इस्तेमाल करके पहुंचा था और उसके पास इसी नाम का फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस भी था।
  • मातार के फर्जी नाम में हसन नाम हिजबुल्ला के महासचिव हसन नसरल्लाह से लिया गया था, जबकि मुगनियेह नाम हिजबुल्लाह के पूर्व बाहरी सुरक्षा प्रमुख इमाद मुगनियेह से लिया गया था। इमाद मुगनियेह पर कई आतंकवादी हमलों की योजना बनाने का आरोप था। 
  • हमले वाली सुबह मातार ने हिजबुल्ला की ओर से चलाई जाने वाले एक वेबसाइट पर जाकर अगस्त महीने में मारे गए संगठन के कथित शहीदों की तस्वीरों के स्क्रीनशॉट भी लिए थे।
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आगे क्या होगा?
मातार को 3 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी। यह सुनवाई अमेरिकी जिला जज रिचर्ड जे. अर्कारा की अदालत में होगी, जिन्होंने इस मामले की सुनवाई की थी। यदि सभी आरोपों में अधिकतम सजा दी जाती है, तो मातार को उम्रकैद की सजा हो सकती है। 
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