सार
दुनियाभर में चर्चा में रहे अमेरिकी आयात टैरिफ पर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के 20 से अधिक राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि ट्रंप अपने अधिकारों से आगे बढ़कर 15% तक शुल्क लगा रहे हैं, जिससे व्यापारियों और आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
दुनियाभर में लंबे समय से चर्चा में रहे अमेरिकी टैरिफ पर अब बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह नीति बार-बार कोर्ट में चुनौती का सामना कर रही है। वहीं दूसरी ओर अब अमेरिका के 20 से अधिक राज्यों ने ट्रंप के नए वैश्विक आयात टैरिफ के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राज्यों का आरोप है कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने अधिकारों से आगे बढ़कर यह शुल्क लगा रहे हैं, जिससे व्यापारियों और आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मुकदमा न्यूयॉर्क स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत में सुना जाएगा।
बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ यह मुकदमा ओरेगन, एरिजोना, कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क समेत कई डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर किया गया है। उनका आरोप है कि ट्रंप दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर 15 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगाने की योजना बना रहे हैं, जो कानून के दायरे से बाहर है।
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इस नीति पर ट्रंप की सफाई समझिए
अपने इस नीति पर ट्रंप का कहना है कि यह टैरिफ अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे व्यापार घाटे को कम करने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने यह शुल्क 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत लगाया है। इस धारा के अनुसार राष्ट्रपति केवल 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगा सकते हैं और यह अधिकतम पांच महीने तक ही लागू रह सकता है। अगर जरूरत हो तो कांग्रेस इसकी अवधि बढ़ा सकती है।
मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का दलील
दूसरी ओर मुकदमा करने वाले राज्यों का कहना है कि यह धारा केवल विशेष परिस्थितियों में इस्तेमाल की जा सकती है, न कि पूरे देशों के सामान पर सामान्य रूप से। उनका मानना है कि इस टैरिफ से राज्यों, व्यापारियों और आम लोगों पर महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
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न्यूयॉर्क स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत में होगी सुनवाई
गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई न्यूयॉर्क स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत में होगी। जहां अदालत तय करेगी कि क्या ट्रंप का नया टैरिफ कानून के तहत है या नहीं। ऐसे में विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला पिछले साल सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द करने के फैसले के बाद आया है। इससे साफ है कि अदालतें राष्ट्रपति के व्यापार संबंधी फैसलों की समीक्षा कर सकती हैं और उन्हें सीमित कर सकती हैं।
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