अमेरिकी सेना (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फ्रीपिक
अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपनी स्वास्थ्य नीति में बड़ा बदलाव करते हुए सैनिकों के लिए फ्लू वैक्सीन को अब अनिवार्य नहीं रखा है। इस फैसले के बाद अब अमेरिकी सैनिक अपनी इच्छा और धार्मिक आस्था के आधार पर वैक्सीन लेने या न लेने का निर्णय ले सकेंगे। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक फ्लू वैक्सीन लेने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। उनका शरीर, आस्था और दृढ़ विश्वास पर समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि, सैन्य सेवाओं को वैक्सीन की अनिवार्यता जारी रखने का अनुरोध करने की अनुमति है। इसके लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है। अमेरिकी सेना में टीकाकरण कार्यक्रम अमेरिकी क्रांति के समय से चले आ रहे हैं। लेकिन कोरोना वायरस महामारी के दौरान यह एक विवादास्पद राजनीतिक मुद्दा बन गया था।
कोविड-19 वैक्सीन विवाद
साल 2021 में कोविड-19 वैक्सीन अनिवार्य की गई थी। इसे मानने से इन्कार करने पर 8,400 से अधिक सैनिकों को सेना से बाहर कर दिया गया। हजारों अन्य ने धार्मिक और चिकित्सा छूट मांगी थी। कांग्रेस ने इस आदेश को रद्द करने पर सहमति व्यक्त की। पेंटागन ने जनवरी 2023 में इस आदेश को वापस ले लिया। तब तक नौसेना, वायु सेना और मरीन कॉर्प्स के करीब 99 फीसदी सैनिकों ने वैक्सीन लगवा ली थी।
पूर्व सैनिकों की वापसी नीति
ट्रंप प्रशासन ने कोविड-19 वैक्सीन से इन्कार करने वाले सैनिकों को वापस सेवा में लाने की नीति बनाई। इसमें उन्हें पिछली तनख्वाह के साथ वापस लाने का प्रावधान था। हालांकि, बहुत कम सैनिकों ने इस नई नीति का लाभ उठाया है। पेंटागन ने मार्च में बताया कि 153 सैनिकों को बहाल किया गया है। हेगसेथ की टीम ने पिछले कई महीनों से इन सैनिकों को व्यक्तिगत रूप से उजागर किया है।
अन्य अनिवार्य वैक्सीन और ऐतिहासिक संदर्भ
फ्लू वैक्सीन आदेश को ऐसे समय में हटाया गया है जब फ्लू का मौसम गंभीर रहा है। जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ छह महीने और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों को वार्षिक इन्फ्लूएंजा वैक्सीन की सलाह देते हैं। ट्रंप प्रशासन बच्चों के लिए भी कुछ वैक्सीन की सिफारिशों को कम कर रहा है। कांग्रेस रिसर्च सर्विस की 2021 की रिपोर्ट में आठ अनिवार्य वैक्सीन सूचीबद्ध थीं। इनमें फ्लू, पोलियो, टिटनेस, खसरा और हेपेटाइटिस ए व बी शामिल थे। रिपोर्ट में धार्मिक कारणों से वैक्सीन से छूट का अनुरोध करने का प्रावधान था।
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