अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी करके 118 जहाजों का रास्ता बदला है और पांच जहाजों को निष्क्रिय किया है। इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने समझौते के ड्राफ्ट को खारिज करते हुए और सख्त शर्तें जोड़ने को कहा है। दूसरी तरफ ईरान ने भी साफ कर दिया है कि बिना आर्थिक राहत और अधिकार मिले वह किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा।
पश्चिम एशिया के समंदर में तनाव बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों को पूरी तरह घेर लिया है। अमेरिकी सैन्य कमान (सेंटकॉम) ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। अमेरिकी सेना ने ईरान जाने और वहां से आने वाले 118 व्यापारिक जहाजों का रास्ता बदल दिया है। यही नहीं, अमेरिकी सेना की बात न मानने वाले पांच जहाजों को पूरी तरह अपाहिज यानी निष्क्रिय कर दिया गया है।
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समंदर में आधी रात को बड़ा एक्शन
अमेरिका ने ईरान की यह नौसैनिक नाकेबंदी 13 अप्रैल को शुरू की थी। अमेरिकी सेना ने साफ चेतावनी दी है। वे ईरान के बंदरगाहों की तरफ आने-जाने वाले सभी जहाजों को रोकते रहेंगे। हैरत की बात यह है कि कार्रवाई तब हो रही है जब दोनों देश शांति की राह पर आने के लिए बातचीत भी कर रहे हैं।
U.S. Sailors guide an MH-60S Sea Hawk helicopter as it lands on the flight deck of USS Milius (DDG 69) during flight operations, May 29. Milius is supporting the U.S. blockade against Iran, which has redirected 118 commercial vessels and disabled 5 as of May 31. pic.twitter.com/24ueYnFYys
ट्रंप ने पलटी बाजी, शर्तें कीं और कड़ी
कुछ दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि समझौता लगभग तय है। लेकिन अब मामला अटक गया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने सलाहकारों के साथ दो घंटे बैठक की। इसके बाद ट्रंप ने समझौते का ड्राफ्ट वापस कर दिया। ट्रंप अब इस समझौते में और ज्यादा कड़ी शर्तें चाहते हैं।
ट्रंप चाहते हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्ती बरती जाए। वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते को हमेशा खुला रखने की गारंटी चाहते हैं। ट्रंप ईरान को कोई आर्थिक राहत देने के पक्ष में नहीं हैं। वे ओबामा के समय हुए समझौते जैसी नरमी नहीं बरतना चाहते। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के समृद्ध यूरेनियम को जब्त कर नष्ट करेगा। वहीं ईरान इस पर बात करने को भी तैयार नहीं है।
ईरान का दो टूक जवाब-हम नहीं झुकेंगे
ईरान ने भी अमेरिका के सामने झुकने से साफ मना कर दिया है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि जब तक उनके अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे, वे कोई समझौता नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा कि हमें दुश्मन के वादों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। हमें ठोस नतीजे चाहिए। दूसरी तरफ अमेरिकी सीनेटर क्रिस कून्स का कहना है कि ट्रंप की शर्तें कागजों पर अच्छी हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर लागू करना बहुत मुश्किल होगा।