फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक्सप्लेनर: क्या हैं अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव, ये क्यों अहम; ट्रंप की शक्तियों पर कैसे डालेंगे असर

Wed, 28 Oct 2026 09:38 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की सभी 435 और उच्च सदन (सीनेट) की 35 सीटों पर वोट पड़ेंगे। जानिए इस चुनाव से कैसे तय होगा ट्रंप का राजनीतिक भविष्य।
विज्ञापन
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 3 नवंबर को होने वाले चुनाव के लिए देश के दोनों प्रमुख दलों- रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी ने कमर कस ली है। अब देश के 21 करोड़ वोटर्स ठीक 8 दिन बाद यह फैसला करेंगे कि देश में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला शासन कितनी मजबूती से आगे बढ़ेगा। 
विज्ञापन


आइये जानते हैं कि अमेरिका में हर चार साल पर होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के अलावा यह मध्यावधि चुनाव क्यों होते हैं? यह चुनाव कराए कैसे जाते हैं और इनसे अमेरिका में क्या बदलता है? इस बार के चुनाव रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए कितने अहम हैं? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताकत पर यह चुनाव कितना असर डालेंगे? आइये जानते हैं...
 
Trending Videos

अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और उच्च सदन और उच्च सदन (सीनेट) का मौजूदा हाल। - फोटो : अमर उजाला

पहले जानें- अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से इतर मध्यावधि चुनाव क्यों होते हैं? 

  • अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हर चार साल में आयोजित किया जाता है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति के कार्यकाल के ठीक आधे रास्ते यानी दो वर्ष बाद भी चुनाव कराए जाते हैं, जिन्हें मध्यावधि चुनाव कहा जाता है।
  • मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति पद के लिए नहीं, बल्कि अमेरिकी संसद- कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) और सीनेट (उच्च सदन) का नियंत्रण तय करने के लिए होते हैं।


1. सांसदों के कार्यकाल और चुनावी चक्र में अंतर के लिए

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन): इसके सभी 435 सदस्यों का कार्यकाल केवल दो साल का होता है। इसलिए, राष्ट्रपति चुनाव के साथ-साथ राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में भी सभी सीटों पर फिर से चुनाव होते हैं। 

सीनेट (उच्च सदन): 100 सीट वाली सीनेट में सांसदों (सीनेटरों) का कार्यकाल छह वर्ष का होता है, लेकिन इनके चुनाव चरणबद्ध होते हैं। हर दो साल में सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों- 35 पर चुनाव कराए जाते हैं। यानी 35 सीटों पर अभी और 35 सीटों पर राष्ट्रपति चुनाव के साथ।

गवर्नर और स्थानीय चुनाव: अमेरिकी संसद के अलावा अमेरिका के 50 राज्यों में से 36 राज्यों में गवर्नर, राज्य विधायिकाओं और स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों का चुनाव भी मध्यावधि चुनाव का हिस्सा होते हैं।

2. शक्तियों का संतुलन और विधायी नियंत्रण

  • अमेरिकी व्यवस्था में संसद (कांग्रेस) देश के लिए कानून बनाती है, संघीय बजट और खर्च को नियंत्रित करती है और राष्ट्रपति की कार्यशैली पर निगरानी रखती है।
  • मध्यावधि चुनाव जनता को यह मौका देते हैं कि वे तय करें कि संसद के किस सदन पर किस राजनीतिक दल का बहुमत रहेगा। 
  • इससे यह निर्धारित होता है कि राष्ट्रपति के पास अपने बचे हुए दो वर्षों के कार्यकाल में नीतियां, कानून और बजट पास कराने की कितनी स्वतंत्रता या चुनौती होगी। 
  • अगर विपक्षी दल किसी भी सदन में बहुमत हासिल कर लेता है, तो वह राष्ट्रपति के विधायी एजेंडे को बाधित कर सकता है और प्रशासन की जांच शुरू कर सकता है।

ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: अमेरिकी चुनाव में किस पार्टी को कितना चंदा; कौन हैं सबसे बड़े दानदाता, कैसे होता है फंडिंग का खेल?


3. राष्ट्रपति के प्रदर्शन पर जनमत संग्रह 

मध्यावधि चुनाव को सत्तारूढ़ राष्ट्रपति के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज और नीतियों पर जनता का एक जनमत संग्रह भी माना जाता है।

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए चुनाव में क्या दांव पर?

1. रिपब्लिकन पार्टी के लिए
रिपब्लिकन पार्टी को दो साल पहले न सिर्फ राष्ट्रपति चुनाव में जीत मिली थी, बल्कि संसद के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में भी मामूली बहुमत मिल गया था। चूंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (कार्यकारिणी) के फैसलों को संसद (विधायिका) से मंजूरी की जरूरत होती है, इसलिए रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत ट्रंप के निर्णयों को लागू करने में अहम साबित हो रहा था। 
  • अगर रिपब्लिकन पार्टी किसी भी एक सदन में बहुमत खो देती है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घरेलू विधायी एजेंडे, आर्थिक नीतियों और बजट प्रस्तावों पर ब्रेक लग सकता है। 
  • संसद पर नियंत्रण रहने की वजह से रिपब्लिकन ट्रंप प्रशासन के खिलाफ डेमोक्रेट्स की ओर से संसदीय जांचों, समन और महाभियोग की कोशिशों को रोक सकती है।
  • सीनेट में बहुमत से रिपब्लिकन पार्टी राष्ट्रपति की ओर से नामित संघीय जजों, सुप्रीम कोर्ट के जजों, कैबिनेट मंत्रियों और राजदूतों की नियुक्ति आसानी से करा सकती है।

2. डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए दांव पर
  • डेमोक्रेट्स को संसद के निचले सदन में बहुमत के लिए कम से कम तीन सीटों और सीनेट में चार सीटों की बढ़त की जरूरत है। किसी भी एक सदन पर नियंत्रण मिलने से डेमोक्रेट्स के पास राष्ट्रपति ट्रंप के कानूनों और बजटीय आवंटन को रोकने की सीधी शक्ति आ जाएगी।
  • समितियों का नियंत्रण मिलने पर डेमोक्रेट्स के पास ट्रंप प्रशासन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों और सरकारी नीतियों की गहन जांच करने, गवाहों को बुलाने और दस्तावेज तलब करने का कानूनी अधिकार आ जाएगा।
  • सिर्फ हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पास राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार होता है, जो डेमोक्रेटिक पार्टी को सदन में बहुमत मिलने पर ही मुमकिन हो सकता है। 
  • वहीं, अगर डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट का नियंत्रण भी मिल जाता है तो वे राष्ट्रपति की ओर से की जाने वाली न्यायिक-प्रशासनिक नियुक्तियों को खारिज कर सकते हैं और अन्य शक्तियों को भी सीमित कर सकते हैं।

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

ट्रंप का राष्ट्रपति पद सुरक्षित, फिर मध्यावधि चुनाव उनकी ताकत पर कैसे डालेंगे असर?

यूं तो मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पद सीधे तौर पर दांव पर नहीं होता, लेकिन इस चुनाव के नतीजे उनके बचे हुए दो साल के कार्यकाल के दौरान उनकी शक्तियों और कामकाजी स्वतंत्रता पर गहरा असर डालते हैं। 

घरेलू एजेंडे पर लग सकती है रोक 
अगर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी किसी एक सदन (हाउस या सीनेट) में भी बहुमत हासिल कर लेती है, तो गैर-सरकारी फंडिंग से जुड़े नए कानूनों का पारित होना रुक सकता है। ट्रंप को अपने बजटीय प्रस्तावों और नीतियों को पास कराने के लिए राजनीतिक विरोधियों से मोलभाव करना पड़ेगा।

हालांकि, विपक्ष के पास संसद का नियंत्रण आने पर भी राष्ट्रपति ट्रंप के पास पारित विधेयकों पर वीटो करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।

सरकारी शटडाउन की आ सकती है नौबत
संघीय एजेंसियों के खर्चों से जुड़े विधेयकों पर होने वाले इस राजनीतिक टकराव के कारण सरकारी कामकाज ठप होने (शटडाउन) की स्थिति बन सकती है।

कड़ी जांच और संसदीय निगरानी का खतरा
  • किसी भी सदन में बहुमत मिलने पर डेमोक्रेट्स को संसदीय समितियों की अध्यक्षता मिल जाएगी। 
  • ये समितियां ट्रंप प्रशासन के फैसलों, उनके व्यावसायिक सौदों, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू कर सकती हैं। 
  • समितियों के पास गवाहों को बुलाने और आधिकारिक दस्तावेज मांगने की कानूनी शक्ति आ जाएगी।

ये भी पढ़ें: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: सर्वे में डेमोक्रेट को बढ़त, मैदान में भारतीय मूल के उम्मीदवार भी; भारतवंशी किसके साथ?
विज्ञापन

महाभियोग की शक्ति 
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स के पास राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार आ जाएगा। हालांकि, उन्हें राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।

विदेश नीति में परिवर्तन
अगर संसद में घरेलू एजेंडे को विपक्ष की ओर से बाधित किया जाता है, तो ट्रंप अपना ध्यान मुख्य रूप से विदेश नीति के संचालन की ओर केंद्रित कर सकते हैं।


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें