अमेरिका में मिड टर्म चुनावों से ठीक पहले चुनाव प्रक्रिया में रूस और चीन के हस्तक्षेप करने का मसला उठ खड़ा हुआ है। अमेरिका सरकार इस बारे में दोनों देशों को चेतावनी दे चुकी है। उनसे कहा गया है कि वे अमेरिकी समाज में टकराव बढ़ाने और मतदाताओं के आत्म-विश्वास को चोट पहुंचाने की कोशिश ना करें।
मिड टर्म चुनावों के सिलसिले में मंगलवार को मतदान होगा। अमेरिका में राष्ट्रपति के चार साल की कार्य अवधि के बीच में होने वाले द्विवार्षिक चुनावों को मिड टर्म्स कहा जाता है। इस दौरान कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटिव के सभी 435 और ऊपरी सदन सीनेट के एक तिहाई सदस्यों का चुनाव होता है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नरों और वहां की विधायिका का चुनाव भी होता है। चुनाव नतीजे मंगलवार रात (भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह) तक आ जाएंगे।
रूस और चीन पर आरोप लगाया गया है कि वे ऑनलाइन माध्यमों से अमेरिका में गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। ये आरोप पिछले महीने से लगने शुरू हुए। तभी साइबर सिक्योरिटी एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर सिक्युरिडी एजेंसी के निदेशक जेन एस्टर्ले ने कहा था कि मतदाताओं में अविश्वास बढ़ाने के लिए कई तरह की झूठी सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। विदेशी ताकतें इसमें योगदान कर रही हैं। रूस और चीन ऐसे आरोपों का खंडन कर चुके हैं।
लेकिन अमेरिकी जांच एजेंसी- फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि इन चुनावों में चीन रूसी तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे नेताओं के खिलाफ दुष्प्रचार किया गया है, जो चीन की आलोचना करते हैं। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद यह आरोप लगा था कि रूस ने ऑनलाइन माध्यमों से ऐसे प्रचार का अभियान चलाया, जिससे तब विजयी हुए डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में माहौल बना।
अमेरिकी साइबर सिक्योरिटी कंपनी मैडियएंट कुछ दिन पहले चेतावनी दी कि इन चुनावों में चीन के हित साधने के मकसद से प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। ये अभियान “ड्रैनगब्रिज” नाम से चलाया जा रहा है। इसके तहत अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता घटाने के लिए आक्रामक प्रचार हो रहा है। इस अभियान कोशिश यह है कि मतदाताओं की मिड टर्म्स में मतदान करने की रुचि खत्म हो जाए।
इसके पहले सोशल मीडिया साइट फेसबुक की संचालक कंपनी मेटा प्लैटफॉर्म्स ने कहा था कि उसने ऐसे फेक अकाउंट बंद किए हैं, जिन्हें चीन से चलाया जा रहा था। इन एकाउंट्स पर गर्भपात और बंदूक नियंत्रण जैसे मुद्दों अमेरिकी समाज को बांटने वाले पोस्ट डाले जाते थे। मेटा ने यह भी कहा था कि उसने रूस समर्थक प्रचार करने वाले अकाउंट्स भी बंद किए हैं।
अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में साइबर सिक्योरिटी के प्रोफेसर स्कॉट व्हाइट ने कहा है- ‘वे हमारे घरेलू माहौल में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करते हैं। फिर वे अपने देश के लोगों को यह बताते हैं कि देखिये लोकतंत्र का क्या परिणाम होता हैः अस्थिरता, दंगा, नस्लीय नफरत और छह जनवरी जैसी घटनाएं (जब अमेरिकी संसद पर डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों ने धावा बोला था)।’
थिंक टैंक रैंड कॉर्प में सैन्य समाजशास्त्री मेरेक पोसार्ड ने कहा है- ‘जब किसी देश में विमर्श तथ्यों और साक्ष्य पर आधारित ना होकर निजी सोच और अटकलों से चलाया जाने लगता है, तब उससे ऐसे मौके पैदा होते हैं, जिसका फायदा विरोधी उठाते हैं।’