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US: महमूद खलील को एक्टर डेबरा विंगर का साथ, तत्काल रिहाई की मांग, ट्रंप टावर में घुसे यहूदियों पर होगी सख्ती

Sat, 15 Mar 2025 03:14 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

आने वाले दिनों में अमेरिका से कई छात्रों को निर्वासित किए जाने की आशंका है। यहूदी अधिकारों और फलस्तीनी लोगों के समर्थन में आवाज उठाने वाले महमूद खलील ट्रंप प्रशासन की रडार पर आ चुके हैं। इसी बीच खलील को अभिनेत्री डेबरा विंगर का समर्थन मिला है। हालांकि, उनकी तत्काल रिहाई की मांग कर रहे यहूदी प्रदर्शनकारियों पर अधिक सख्ती की तैयारी भी हो रही है। न्याय विभाग कोलंबिया विश्वविद्यालय की भूमिका की जांच कर रहा है। जानिए क्या है पूरा मामला
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI
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विस्तार
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हजारों अवैध लोगों को निर्वासित कर रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की रडार पर अब छात्र भी आ गए हैं। फलस्तीन के समर्थन में आवाज उठाने वाले महमूद खलील पर निर्वासन की तलवार लटक रही है। इसी बीच खलील के समर्थकों का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। कार्रवाई के विरोध में उनके समर्थकों ने न्यूयॉर्क में ट्रंप टावर अलावा देश के अन्य स्थानों पर भी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 'इस्राइल को हथियार देना बंद करो' और 'महमूद खलील को तत्काल रिहा करो' जैसे नारे भी लगाए। अब ताजा घटनाक्रम में ट्रंप प्रशासन का न्याय विभाग कोलंबिया विश्वविद्यालय की भूमिका की जांच कर रहा है। सरकार जानना चाहती है कि क्या कैंपस में लोगों को छिपाने में मदद मुहैया कराई गई।
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राष्ट्रपति ने छात्रों को निर्वासित करने की कसम खाई है
ट्रंप टावर में घुसे प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने खलील की गिरफ्तारी को सही माना है। उन्होंने भविष्य में और सख्ती का साफ संकेत देते हुए कहा, आने वाले दिनों में कई और लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा, यह केवल शुरुआत है। बकौल ट्रंप, 'उन्होंने उन छात्रों को निर्वासित करने की कसम खाई है, जो आतंकवाद समर्थक, यहूदी और अमेरिका विरोधी गतिविधि' में संलिप्त हैं।'

कौन हैं खलील?
30 साल के स्थायी अमेरिकी निवासी महमूद खलील ने एक अमेरिकी महिला से विवाह किया है। दरअसल, बीते वर्ष कई छात्रों ने 'फलस्तीनी समर्थक विरोध प्रदर्शनों' में हिस्सा लिया। इस दौरान कोलंबिया विश्वविद्यालय परिसर की इमारत पर कथित कब्जे की खबर भी आई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक खलील इन प्रदर्शनकारियों के अगुआ थे। अब सख्ती दिखाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ छात्रों को निलंबित जबकि कई प्रदर्शनकारियों को निष्कासित कर दिया है। फिलहाल, पुलिस ने उनके खिलाफ कानूनों को तोड़ने जैसे गंभीर आरोप नहीं लगाए हैं। शनिवार को उन्हें न्यूयॉर्क में आवासीय अपार्टमेंट के बाहर से गिरफ्तार किया गया। उन्हें लुइसियाना के आव्रजन निरोध केंद्र में रखा गया है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन खलील को निर्वासित कर सकता है। खलील की पत्नी अभी गर्भवती हैं और उनके पहले बच्चे की मां बनने वाली हैं। उन्होंने दिसंबर में कोलंबिया से मास्टर डिग्री की पढ़ाई पूरी की।
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खलील के समर्थन में किस संगठन ने किया प्रदर्शन 
1996 में स्थापित 'यहूदी वॉयस फॉर पीस' नाम के संगठन का दावा है कि अमेरिकी यहूदियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए करीब 30 साल पहले इसका गठन किया गया। संगठन के मुताबिक इस जमीनी आंदोलन के तहत दुनियाभर में फलस्तीनियों के अधिकारों की वकालत की जाती है। यहूदियों के इस समूह का मकसद, 'फलस्तीनियों पर इस्राइल के अत्याचार के लिए अमेरिकी समर्थन को खत्म करना' है।

खलील को अभिनेत्री डेबरा विंगर का भी समर्थन मिला
बड़ी संख्या में ट्रंप टावर पहुंचे प्रदर्शनकारियों को अभिनेत्री डेबरा विंगर का भी समर्थन मिला। हालांकि, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन 'यहूदी विरोधी भावनाओं को भड़काने' का काम कर रहा है। सरकार को यहूदियों की सुरक्षा में कोई दिलचस्पी नहीं है। विंगर ने कहा, वे अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। वे महमूद खलील को अवैध रूप से हिरासत में लेने और अज्ञात जगह पर रखने का विरोध करने आई हैं। खलील के वकील को भी उनकी लोकेशन के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। अमेरिका में ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए। एक अन्य प्रदर्शनकारी सोफी एडेलहार्ट ने कहा, ट्रंप टावर में घुसने का मकसद राष्ट्रपति की नीतियों का प्रतीकात्मक विरोध करना था। बकौल सोफी, इसी इमारत के सुनहरे एस्केलेटर पर ट्रंप ने 9 साल पहले (साल 2016 में) खुद को राष्ट्रपति पद का रिपब्लिकन प्रत्याशी घोषित किया था।

हाईप्रोफाइल मुख्यालय में घुसे प्रदर्शनकारी, चिंता क्यों? 
ट्रंप टावर में प्रदर्शनकारियों का घुसना इसलिए भी चौंकाने वाली घटना रही क्योंकि यहां सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होते हैं। यह ट्रंप की संस्था का मुख्यालय है। जब राष्ट्रपति न्यूयॉर्क में होते हैं तो यहीं रहते हैं। इस बहुमंजिला इमारत के एट्रियम में भोजनालय जैसी सुविधाओं का लुत्फ उठाने बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इसके अलावा ट्रंप के समर्थन में जमा होने वाले लोगों के साथ-साथ उनका विरोध करने के लिए लोग अक्सर इस गगनचुंबी इमारत के पास जमा होते हैं।

15 महीने तक चले 'रक्तपात' का विश्वविद्यालय में विरोध, अब तक 2000 गिरफ्तारियां
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में 15 महीने से अधिक समय तक चले इस्राइल-हमास हिंसक संघर्ष में 46 हजार से अधिक लोग हताहत हुए। गाजा पट्टी से लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा। फलस्तीन के नागरिकों को भी युद्ध की विभीषिका झेलनी पड़ी। इस्राइल का साथ देने के लिए अमेरिका की जमकर आलोचना हुई। इसी सिलसिले में अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय से फलस्तीन समर्थक आंदोलन भी शुरू हुआ। पिछले साल शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अमेरिका के कई राज्यों में फैल गया था। देशभर में 2000 से अधिक गिरफ्तारियों की खबर सामने आई थी।
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