अमेरिका में सत्ता और विपक्षी पक्ष के कुछ सांसदों ने यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजनटेटिव और सीनेट में एक प्रस्ताव पेश किया है। जिसमें अमेरिकी सरकार से चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) से संबद्ध वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग संस्थानों की एक सूची तैयार करने के लिए कहा गया है।
इस विधेयक में चीनी मिलिट्री संस्थानों में काम करने वाले या प्रायोजित व्यक्तियों को अमेरिका में छात्र या रिसर्च वीजा देने से प्रतिबंधित करने को कहा गया है। सांसद टॉम कॉटन, चक ग्रासले, टेड क्रूज, मार्शा ब्लैकबर्न, जोश हावले और मार्को रुबियो ने सीनेट में विधेयक को पेश किया। वहीं कांग्रेसमैन माइक गलाघेर और विक्की हार्ट्जलर ने हाउस में विधेयक को प्रस्तुत किया।
सांसद ने आरोप लगाया कि चीनी मिलिट्री वैज्ञानिकों का अमेरिकी और अन्य पश्चिमी देशों में दोहरी उपयोग वाली प्रौद्योगिकी पर शोध जारी है। कुछ अनुमानों के अनुसार बीते दशक में पीएलए ने लगभग 2,500 मिलिट्री इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को पढ़ाई करने के लिए विदेश भेजा है। सांसदों का आरोप है कि कई बार यह वैज्ञानिक चीनी मिलिट्री के साथ अपने संबंधों का खुलासा नहीं करते हैं।
कांग्रेसमैन गलाघेर ने कहा, 'हालिया सालों में पीएलए प्रयोजित हजारों वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने विदेशों में संवेदनशील विषय पर शोध किया है। जिसमें अमेरिका भी शामिल है। पीएलए खुले तौर पर स्वीकार करता है कि वह नई सैन्य प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए इन प्रयासों का लाभ उठाता है। हम इससे अपने राष्ट्र की सुरक्षा को होने वाले खतरे को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।'
हार्ट्जलर ने कहा कि यह एक ऐसा विधेयक है जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि चीनी मिलिट्री हमारे विश्वविद्यालयों में संवेदनशील जानकारी को लेकर सहयोग नहीं कर रही हैं। बहुत से व्यक्ति आमतौर पर पीएलए और कम्युनिस्ट पार्टी के साथ अपने संबंधों का खुलासा नहीं करते हैं। जिससे उन्हें अपने सैन्य संबद्धता के स्कूलों के ज्ञान के बिना शीर्ष विश्वविद्यालयों में काम करने की अनुमति मिलती है।
हार्ट्जलर ने कहा, 'यह विधेयक चीन को हमारे स्वतंत्र और खुले समाज का शोषण करने की कोशिशों से रोकने में महत्वपूर्ण कदम होगा।' सांसद कॉटन ने कहा कि पीएलए के वैज्ञानिकों को अमेरिकी शोध लैब से दूर रखना आत्मरक्षा का मूल कदम है। यह आश्चर्यजनक है कि इस प्रथा पर पहले अंकुश नहीं लगाया गया है।