बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति
गौरतलब है कि बांग्लादेश में एंटी-टेररिज्म कानून 2025 में बदलाव कर अवामी लीग और उससे जुड़े संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है। पांच अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसके बाद अंतरिम सरकार ने अवामी लीग को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया। हाल ही में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में, अनुपस्थिति में, मौत की सजा सुनाई है।
अवामी लीग के राजनीतिक मैदान से बाहर होने के बाद खालिदा जिया की बीएनपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जबकि जमात-ए-इस्लामी उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानी जा रही है। अवामी लीग के कई नेता या तो जेल में हैं, फरार हैं या देश से बाहर चले गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि बांग्लादेश में चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय दबाव दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।
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बांग्लादेश में अब-तक क्यों जारी है हिंसा?
बीते कुछ दिनों से बांग्लादेश में हिंसा बदस्तूर जारी है। ढाका से लेकर चटगांव तक भीड़ के प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के छात्र नेता उस्मान हादी को गोली मार दी गई थी। इसके बाद 18 दिसंबर को हादी का सिंगापुर में निधन हो गया और तब से लेकर अब तक बांग्लादेश में लगातार माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। इसके ठीक बाद चटगांव में एक हिंदू शख्स की लिंचिंग की घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया।
अब बांग्लादेश के नए राजनीतिक दल नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के एक नेता पर भी हमला हुआ है। सोमवार को एनसीपी के मोहम्मद मुतालिब सिकदर को खुलना में गोली मार दी गई। इस हमले में सिकदर के सिर पर चोट आई है। बताया गया है कि उसे गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।