अमेरिका में प्राकृतिक नागरिकों को बड़े सरकारी पदों से रोकने के प्रस्ताव पर विवाद छिड़ गया है। रिपब्लिकन सांसद नैन्सी मेस के इस प्रस्ताव को डेमोक्रेट्स ने नस्लवादी और भेदभावपूर्ण बताया है। आइए विस्तार से जानते हैं।
अमेरिका में प्राकृतिक रूप से नागरिकता हासिल करने वाले लोगों के अधिकारों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। रिपब्लिकन सांसद नैन्सी मेस ने एक संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें प्राकृतिक रूप से अमेरिकी नागरिक बने लोगों को कांग्रेस सदस्य, संघीय न्यायाधीश और सीनेट की पुष्टि वाले महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त होने से रोकने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे नस्लवादी, घृणित और विदेशी मूल के लोगों के खिलाफ बताया है।
साउथ कैरोलिना की सांसद मेस ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय से लंबित संवैधानिक संशोधन पेश किया है। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बनने के लिए पहले से ही नेचुरल बॉर्न सिटिजन यानी जन्म से अमेरिकी नागरिक होना जरूरी है, इसलिए यही नियम कांग्रेस, संघीय अदालतों और सीनेट से मंजूर होने वाले पदों पर भी लागू होना चाहिए।
मेस ने अपने पोस्ट में डेमोक्रेटिक सांसदों इल्हान उमर, प्रमिला जयपाल और श्री थानेदार की तस्वीरें भी साझा कीं। इनमें उमर सोमालियाई मूल की अमेरिकी हैं, जबकि जयपाल और थानेदार भारतीय मूल के नेता हैं।
मेस ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका के कानून लिखने वाले, न्यायाधीशों की पुष्टि करने वाले और दुनिया के सामने अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों की निष्ठा सिर्फ अमेरिका के प्रति होनी चाहिए, किसी दूसरे देश के प्रति नहीं। उन्होंने खास तौर पर इल्हान उमर का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ नेताओं की वफादारी अमेरिका से बाहर दिखाई देती है।
हालांकि, इस प्रस्ताव का असर केवल डेमोक्रेट्स तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका की कांग्रेस में ऐसे 26 सदस्य हैं जो विदेश में जन्मे हैं, जिनमें कुछ रिपब्लिकन सांसद भी शामिल हैं।
डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की। भारतीय मूल की सांसद प्रमिला जयपाल ने इसे संकीर्ण सोच, विदेशी विरोधी मानसिकता और अमेरिका के इतिहास का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक नस्लवाद से प्रेरित है और कांग्रेस में इसकी कोई जगह नहीं होनी चाहिए।