अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय दवा निर्माता कंपनी को रिकॉर्ड छिपाने और नष्ट करने का दोषी मानते हुए पांच करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया है। चूंकि किसी भी दवा को मंजूरी देने से पहले एफडीए जगह का निरीक्षण करती है और वर्ष 2013 में इस टीम ने प्लांट का निरीक्षण करते वक्त पाया कि कंपनी ने ना केवल जरूरी रिकॉर्ड छिपाए बल्कि उन्हें नष्ट भी किया।
कैंसर की दवा बनाने वाली फ्रेजेनियस काबी ऑन्कोलॉजी लिमिटेड (एफकेओएल) को एफडीए कानूनों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। कंपनी पर तीन करोड़ डॉलर का आपराधिक जुर्माना लगाने के साथ दो करोड़ डॉलर का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है।