अमेरिका में भारतवंशी वनिता गुप्ता
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अमेरिका में भारतवंशी वनिता गुप्ता को एसोसिएट अटॉर्नी जनरल (सहायक महान्यायवादी) के रूप में नामांकित करने पर सीनेट की न्यायिक समिति बराबरी पर बंट गई। समिति ने नागरिक अधिकारों की वकील वनिता के नामांकन पर रिपब्लिकन पार्टी की आपत्तियों के बीच 11-11 वोट दिए। इस तरह भारतीय मूल की अमेरिकी वकील के नाम की पुष्टि में फिलहाल पेंच फंस गया है।
रिपब्लिकन आपत्तियों के बीच मिले 11-11 वोट, अब दाखिल करना होगा निर्वहन प्रस्ताव
अब सीनेट में बहुसंख्यक दल के नेता और डेमोक्रेट चक शूमर उनके नामांकन पर एक निर्वहन प्रस्ताव दाखिल कर उसे पूर्ण सीनेट वोट की मंजूरी के लिए भेज सकते हैं। इसके बाद यदि उनके नाम की पुष्टि होती है तो 46 वर्षीय गुप्ता अमेरिकी एसोसिएट अटॉर्नी जनरल के पद पर सेवा देने वाली पहली अश्वेत महिला होंगी।
उनके नाम की पुष्टि के लिए 100 से ज्यादा अमेरिकी संगठनों ने सीनेट से आग्रह किया है। मतदान के बाद सीनेट की न्यायिक समिति ने कहा है कि बहुसंख्यक नेता चक शूमर अब वनिता के नामांकन के लिए एस. रेस. 27 प्रावधान के तहत डिस्चार्ज प्रस्ताव फाइल करके उसे सीनेट में दाखिल कर सकते हैं। इस बीच, समिति के रिपब्लिकन सदस्यों ने सीनेटर व न्यायिक समिति के अध्यक्ष डिक डर्बिन को पत्र लिखकर गुप्ता पर दूसरी पुष्टि की सुनवाई की मांग की है ताकि वे अपने भ्रामक बयानों के लिए जवाब दे सकें।
भ्रामक बयानों पर सफाई दें
सीनेट की न्यायिक समिति ने वनिता गुप्ता पर कम से कम चार मुद्दों पर समिति को गुमराह करने का आरोप लगाया। रिपब्लिकन सदस्यों ने एक पत्र में लिखा कि वनिता ने योग्य प्रतिरक्षा को खत्म करने का समर्थन करने, दवाओं के गैर-आपराधिक करने का समर्थन करने, पुलिस बचाव का समर्थन करने और मृत्यु दंड रिकॉर्ड को लेकर कोई जवाब नहीं दिया है। उन्हें अपने भ्रामक बयानों पर सफाई देनी ही चाहिए।