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'यूरोप अपनी रक्षा खुद करे': नाटो में US की दो टूक, कहा- अमेरिकी सैनिकों की होगी समीक्षा; क्या है NATO 3.0?

Thu, 18 Jun 2026 03:47 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रुसेल्स

सार

NATO Meet: ब्रुसेल्स में नाटो बैठक के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने को कहा। उन्होंने यूरोप में अमेरिकी सैन्य बलों की छह महीने की समीक्षा का ऐलान किया और नाटो 3.0 की अवधारणा पेश की। अमेरिका का कहना है कि उसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और चीन से जुड़ी चुनौतियों पर अधिक ध्यान देना है, इसलिए यूरोप को अधिक आत्मनिर्भर बनना होगा। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
 
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नाटो सहयोगियाों पर अमेरिका का सख्त रुख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यूरोप की सुरक्षा और नाटो की भविष्य की भूमिका को लेकर अमेरिका ने बड़ा संकेत दिया है। ब्रुसेल्स में नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अब उन्हें अपनी सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। उन्होंने अमेरिकी सैन्य बलों की यूरोप में तैनाती की छह महीने की व्यापक समीक्षा का भी ऐलान किया। हेगसेथ के बयान को ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अमेरिका अपना ध्यान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और चीन से जुड़ी चुनौतियों पर अधिक केंद्रित करना चाहता है।

यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की समीक्षा क्यों होगी?

पीट हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन अगले छह महीनों में यूरोप में तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की वास्तविक समीक्षा करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समीक्षा इस आधार पर होगी कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी कितनी तेजी और गंभीरता से अपने हाथ में लेते हैं। हेगसेथ ने कहा कि नाटो को ऐसी दिशा में बढ़ना चाहिए जहां यूरोप अपनी रक्षा का नेतृत्व खुद करे। उनके मुताबिक अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय सहयोगी केवल अमेरिकी सुरक्षा छतरी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करें।

यूरोपीय सहयोगियों पर क्यों भड़के अमेरिकी रक्षा मंत्री?

बैठक के दौरान हेगसेथ ने कुछ नाटो सहयोगियों की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों के दौरान कुछ यूरोपीय देशों ने अमेरिकी सेना को अपने ठिकानों, हवाई क्षेत्र और अन्य सुविधाओं तक अपेक्षित पहुंच नहीं दी। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि इससे अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा और अभियान क्षमता प्रभावित हुई। उनके अनुसार सहयोगी देशों को ऐसे मामलों में अधिक स्पष्ट और विश्वसनीय समर्थन देना चाहिए था।

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क्या है 'नाटो 3.0' का अमेरिकी प्रस्ताव?

हेगसेथ ने नाटो को नाटो 3.0 के रूप में पुनर्गठित करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि शीत युद्ध के बाद गठबंधन को अब फिर से एक मजबूत सैन्य संगठन के रूप में तैयार करने की जरूरत है। उनके मुताबिक नाटो को केवल राजनीतिक मंच नहीं बल्कि ऐसी सैन्य ताकत बनना चाहिए जो किसी भी खतरे को रोकने की क्षमता रखे। उन्होंने कहा कि यूरोप की पारंपरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी यूरोपीय देशों को ही संभालनी होगी और अमेरिका सहायक भूमिका में रहेगा।

अमेरिका अपनी सैन्य रणनीति में क्या बदलाव कर रहा है?

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि अमेरिका 2027 में अपनी रक्षा क्षमता पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर का निवेश करेगा। उन्होंने इसे "आर्सेनल ऑफ फ्रीडम" यानी स्वतंत्रता के शस्त्रागार का नाम दिया। साथ ही ट्रंप प्रशासन पहले ही संकेत दे चुका है कि किसी बड़े संकट की स्थिति में वह पहले की तरह हर सैन्य संसाधन नाटो सहयोगियों को उपलब्ध नहीं कराएगा। अमेरिका का तर्क है कि उसे एक साथ दो संभावित संघर्षों की तैयारी रखनी होगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन से उत्पन्न चुनौतियों के लिए भी पर्याप्त सैन्य संसाधन सुरक्षित रखने होंगे।

नाटो और यूरोप के लिए इसका क्या मतलब है?

नाटो के अनुच्छेद-5 के तहत किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है। हालांकि यह प्रावधान सभी देशों को सैन्य बल भेजने के लिए बाध्य नहीं करता। अमेरिका अब यह संकेत दे रहा है कि यूरोप को अपनी रक्षा व्यवस्था अधिक आत्मनिर्भर बनानी होगी। हालांकि अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह यूरोप में तैनात अपने परमाणु हथियारों को हटाने की कोई योजना नहीं बना रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में अमेरिकी समीक्षा, नाटो की नई रणनीति और यूरोप की सैन्य तैयारियां वैश्विक सुरक्षा राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बनने जा रही हैं।

क्या बदल रही है ट्रंप प्रशासन की वैश्विक प्राथमिकता?

अमेरिकी बयानों से साफ संकेत मिल रहा है कि ट्रंप प्रशासन यूरोप की तुलना में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अधिक रणनीतिक महत्व दे रहा है। अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय देश अपनी रक्षा पर अधिक खर्च करें और क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद निभाएं। वहीं अमेरिका चीन और एशिया-प्रशांत क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की तैयारी कर रहा है। यही वजह है कि नाटो के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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