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स्पूतनिक-वी वैक्सीन खरीद के मसले पर जर्मनी से खफा अमेरिका, बताया रूस पर लगाए उसके प्रतिबंधों का उल्लंघन

Tue, 13 Apr 2021 03:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बॉन

सार

घोषित तौर पर स्पूतनिक-वी को बनाने का खर्च रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) ने उठाया है। आरडीआईएफ ने पिछले हफ्ते एलान किया कि उसने जर्मनी सरकार के प्रतिनिधियों से टीके की बिक्री के बारे में बातचीत शुरू की है...
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स्पूत्निक वी - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी को खरीदने की जर्मनी की योजना से अमेरिका नाराज है। इस मामले में दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं। जर्मनी के एक प्रमुख अखबार बिल्ड ने इस बारे में एक विशेष रिपोर्ट छापी है। अखबार ने कहा है कि अमेरिका इस बात से बहुत नाराज है कि जर्मनी ने रूस से वैक्सीन खरीदने की योजना बनाई है। अमेरिका की राय में ऐसा करना हाल में रूस पर लगाए गए उसके प्रतिबंधों का उल्लंघन होगा।

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इस रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने इस अखबार को बताया कि स्पूतनिक-वी तैयार करने में शामिल दो संस्थाऩ अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये संस्थान गुपचुप रासायनिक हथियार बनाने में भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा रूस से वैक्सीन खरीदना रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के विरोधी नेता अलेक्सी नावालनी को जेल में रखे जाने के मामले में लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लंघन होगा।

घोषित तौर पर स्पूतनिक-वी को बनाने का खर्च रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) ने उठाया है। आरडीआईएफ ने पिछले हफ्ते एलान किया कि उसने जर्मनी सरकार के प्रतिनिधियों से टीके की बिक्री के बारे में बातचीत शुरू की है। हालांकि यूरोपियन यूनियन (ईयू) की ड्रग एजेंसी ने अभी स्पूतनिक-वी के इस्तेमाल को हरी झंडी नहीं दी है, इसके बावजूद ये बातचीत आगे बढ़ाई जा रही है। जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जन्स स्पाहन ने कहा है कि अभी ये बातचीत ये जानने के लिए की जा रही है कि रूस कब और कितनी मात्रा में वैक्सीन की सप्लाई कर सकता है।
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पश्चिमी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक इसके पहले जर्मनी ने ईयू पर दबाव डाला था कि वैक्सीन को ड्रग एजेंसी की हरी झंडी मिलने के पहले ही वह रूस से स्पूतनिक-वी की खरीदारी पर बातचीत शुरू कर दे। एक अन्य खबर के मुताबिक जर्मनी की दवा बनाने वाली कंपनी आर-फार्म इसी साल गर्मियों से बावरिया राज्य में रूस से करार के तहत स्पूतनिक-वी का उत्पादन शुरू कर देगी।

गौरतलब है कि ईयू की ड्रग एजेंसी की हरी झंडी के बिना ही ईयू के सदस्य दो देशों- स्लोवाकिया और हंगरी में स्पूतनिक-वी टीका को लगाने का काम कई हफ्ते पहले से चल रहा है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल लांसेट में पिछले महीने छपी रिपोर्ट में स्पूतनिक-वी को 91.6 फीसदी प्रभावी बताया गया था। उसके बाद यूरोपीय देशों में इस वैक्सीन की मांग बढ़ गई।

कई देशों में हाल के जनमत सर्वेक्षणों में आधे से अधिक लोगों ने कहा है कि वे रूसी वैक्सीन लगवाने को तैयार हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ये आरोप लगा चुके हैं कि अमेरिकी कंपनियां फाइजर और मॉडेरना रूसी वैक्सीन के खिलाफ लॉबिंग कर रही हैं, ताकि वे अपने टीके यूरोप को बेच सकें।

ईयू के भीतर टीकाकरण की रफ्तार बेहद धीमी है। उधर कई देशों को अब कोरोना महामारी की तीसरी लहर का सामना करना पड़ रहा है। जर्मनी में लगातार बढ़ रहे मामलों के कारण अब कुल संक्रमित लोगों की संख्या 30 लाख से ज्यादा हो चुकी है। सोमवार को जर्मनी में संक्रमण के 13 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए। इसलिए वहां जल्द से जल्द टीकाकरण की मांग तेज हो गई है। इसी कारण वहां स्पूतनिक-वी के पक्ष में माहौल बना है। जर्मन राज्य बावरिया ने अपने तईं ये वैक्सीन खरीदने का फैसला कर लिया है, हालांकि उसने कहा है कि असल खरीद ईयू की ड्रग एजेंसी की हरी झंडी मिलने के बाद ही होगी।

अब इस मामले में अमेरिका से संबंध बिगड़ने का नया पेच फंसता दिख रहा है। दोनों देशों में पहले से ही नॉर्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइपलाइन के मसले पर तनाव है। ये गैस पाइपलाइन भी रूस से जर्मनी तक बनाई जा रही है, जिससे रूसी गैस की जर्मनी को सप्लाई होगी। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ये पाइपलाइन यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी हितों के लिए खतरनाक है। लेकिन अब तक जर्मनी ने ऐसी आलोचनाओं की अनदेखी की है। इसलिए मुमकिन है कि वह स्पूतनिक-वी खरीदने के इरादे पर भी कायम रहे।

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