फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Iran School Attack Aftermath: अमेरिकी हमले में मिनाब के स्कूल में मारे गए थे 120 बच्चे, शिक्षिका का दर्द छलका

Mon, 10 Aug 2026 09:43 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, तेहरान/मिनाब।
विज्ञापन
मिनाब के स्कूल में 120 बच्चों की मौत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

आप अब इसे स्कूल नहीं कह सकते। यहां अब सिर्फ ऐसी दीवारें हैं, जहां मौत का सन्नाटा गूंजता है और खून की गंध आती है। यह बात ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में करीब पांच माह पहले अमेरिकी हमले में तबाह हुए स्कूल की शिक्षिका अमाइनेह नदीमी ने कही। उस दिन की घटना बयां करते समय उनके चेहरे पर पीड़ा साफ झलकती है।

विज्ञापन


अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जंग के पहले दिन शजरेह तय्यबेह प्राथमिक स्कूल अमेरिकी टोमाहाक मिसाइल का निशाना बना था। तबाही के निशान आज भी ताजा हैं, स्कूल की जगह मलबे का ढेर नजर आता है। इस हमले में 120 बच्चों समेत 156 बेकसूर लोग मारे गए थे। इस घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।

द गार्जियन ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट ने जंग के बाद बदले ईरान के हालात के बारे में बताया। मिनाब में तबाही के इस मंजर के बीच जब राहत कर्मी मलबे को हटा रहे थे, तो उन्हें कंक्रीट के टुकड़ों के बीच आठ साल की माह्या सलारी की एक कॉपी मिली, जिसके पन्ने अभी भी सुरक्षित थे। माह्या अपने छोटे भाई अली के साथ स्कूल में थी और हमले से ठीक पहले उनकी मां उन्हें लेने आई थीं। इस हमले में तीनों की मौत हो गई थी। शहर की दीवारों और दुकानों पर अब मृत बच्चों की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी हैं, जो नागरिकों की पीड़ा का प्रतीक बन चुकी हैं।
विज्ञापन


मुझे लगा सब निकल गए...पर वो तो मलबे में दफन हो गए थे
अमाइनेह नदीमी इस स्कूल में छह साल तक पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ाया करती थीं। अमाइनेह ने बताया कि हमले के बाद उन्होंने अपने माता-पिता को नंगे पांव इमारत की तरफ दौड़ते देखा। वह बताती हैं, एकबारगी तो मुझे यही लगा कि हर कोई बाहर निकल गया है।  लेकिन बाद में समझ आया कि वे सब मलबे के नीचे थे।

बच्चों की छोटी-छोटी कब्रें देती हैं दर्द
मिनाब के कब्रिस्तान का नजारा भावुक कर देने वाला है। हमले में मारे गए बच्चों की छोटी-छोटी कब्रों की पंक्तियों के बीच से गुजरते लोगों के चेहरे पर जंग का दर्द उभर आता है। मासूमेह मेहरान शेखबादी लगभग हर दिन यहां आती हैं। उनकी नौ साल की बेटी, सतायेश, इस हमले में मारी गई थी। वह कहती हैं, जब मैं पहुंची तो वहां केवल धुआं और बच्चों के बुरी तरह जले होने के कारण एक अजीब-सी गंध आ रही थी। मैंने मैंने एक हाथ देखा। थोड़ी दूर एक पैर देखा। मासूम बच्चों के चीथड़े उड़ गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें