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पल्ला झाड़ रहा US: PAK से लौटे वेंस बोले- ईरान के पाले में गेंद, तेहरान पर लगाए आर्थिक आतंकवाद जैसे गंभीर आरोप

Tue, 14 Apr 2026 11:49 AM IST
Shubham Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि इस्लामाबाद में ईरान के साथ हुई 21 घंटे की वार्ता पूरी तरह विफल नहीं रही, बल्कि कुछ प्रगति हुई है। हालांकि समझौता अभी अधूरा है। अमेरिका का रुख साफ है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। अब आगे की जिम्मेदारी ईरान की है और गेंद उसके पाले में है।

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जेडी वेंस, अमेरिकी उपराष्ट्रपति - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कुछ दिन पहले इस्लामाबाद में हुए शांति वार्ता के असफल रहने के असली वजहों पर जोर देते हुए कई अहम और बड़े खुलासे किए। वेंस ने कहा कि बातचीत पूरी तरह विफल नहीं हुई, बल्कि इसमें कुछ प्रगति जरूर हुई है। दूसरी ओर वेंस ने इस बात पर भी जोर दिया कि शांति वार्ता को लेकर अमेरिका का रुख पूरी तरह से साफ है और अब बारी ईरान को अपना फैसला लेने की है। वेंस ने इस बात को ऐसे कहा कि अमेरिका ने बातचीत को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है और अब गेंद ईरान के पाले में है।

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वेंस ने कहा कि ईरान ने बातचीत में अमेरिका की दिशा में कुछ कदम बढ़ाए हैं, लेकिन अभी वह पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब आगे की जिम्मेदारी ईरान पर है कि वह समझौते को आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि हमने अच्छी प्रगति की है, लेकिन अभी समझौता पूरा नहीं हुआ है।

ईरान पर लगाया आर्थिक आतंकवाद फैलाने का आरोप
दूसरी ओर वेंस ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में यह भी कहा कि वह पूरी तरह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस बात से सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु बम नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ईरान दुनिया भर में आर्थिक आतंकवाद फैलाने जैसी गतिविधियों में शामिल है, तो अगर उसके पास परमाणु हथियार आ गया तो यह और भी खतरनाक स्थिति होगी। वेंस ने कहा कि इस पूरी बातचीत का सकारात्मक पहलू यह है कि पहली बार अमेरिका और ईरान की सरकारों के बीच इतने उच्च स्तर पर बातचीत हुई।
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उनके अनुसार, यह अपने आप में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है, क्योंकि इससे पहले इस तरह की सीधी और बड़े स्तर की बातचीत शायद ही कभी हुई हो। वेंस ने अपने बयान में यह भी साफ कहा कि अमेरिका की रेड लाइन यानी मुख्य शर्त यही है कि ईरान किसी भी हालत में परमाणु हथियार न बनाए। उन्होंने आगे कहा कि अगर ईरान अमेरिका की इस शर्त को मान ले और परमाणु हथियार न बनाने की पक्की गारंटी दे, तभी दोनों देशों के बीच एक अच्छा समझौता हो सकता है। लेकिन अगर ईरान ऐसा नहीं करता है, तो बातचीत आगे नहीं बढ़ पाएगी।

समझिए बातचीत क्यों रुकी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 21 घंटे चली इस बातचीत में मुख्य विवाद ईरान के परमाणु ईंधन संवर्धन को लेकर था। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु क्षमता सीमित करे, लेकिन ईरान इस पर पूरी तरह तैयार नहीं हुआ। ऐसे में वेंस ने यह भी कहा कि इस्लामाबाद में बातचीत के लिए जो टीम भेजी थी। उसके पास निर्णय लेने की क्षमता नहीं थी। वेंस ने कहा कि ईरानी टीम को कई फैसलों के लिए तेहरान से मंजूरी लेनी पड़ती है, इसलिए तुरंत समझौता नहीं हो पाया और ये वार्ता के असफल रहने का सबसे बड़ा कारण बना। 

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परमाणु कार्यक्रम को लेकर वेंस ने भी साफ किया रुख 
वेंस ने साफ कहा कि वह पूरी तरह डोनाल्ड ट्रंप की इस बात से सहमत हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान अमेरिका की रेड लाइन मान लेता है, तो यह दोनों देशों के लिए अच्छा समझौता हो सकता है। वेंस के अनुसार, अब अगला कदम ईरान को उठाना है क्योंकि अमेरिका ने बातचीत में कई प्रस्ताव पहले ही रख दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा ऊर्जा कीमतें लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर रही हैं, लेकिन यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी और अमेरिका इस पर काम कर रहा है।

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