अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक नए फैसले ने दोनों देशों के बीच इस कड़वाहट को और ज्यादा बढ़ा दिया है। दरअसल ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत 'यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड' को कैरेबियन सागर से हटाकर मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) भेजने का आदेश दिया है। यह मिडिल ईस्ट में तैनात होने वाला अमेरिका का दूसरा बड़ा विमानवाहक पोत होगा। इस इलाके में 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' विमानवाहक पोत पहले से ही अपनी मौजूदगी बनाए हुए है।
ट्रंप प्रशासन ईरान पर बनाना चाहता दबाव
इस खबर को सबसे पहले द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया था। ट्रंप के इस फैसले के बाद अब मध्य पूर्व के इलाके में अमेरिका के दो बड़े विमानवाहक पोत और उनके साथ चलने वाले वॉरशिप इस इलाके में पहुंच जाएंगे। ट्रंप प्रशासन इस कदम के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाना चाहता है। सैन्य गतिविधियों की जानकारी देने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह बातें साझा की हैं।
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पहले से तैनात है अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत
यूएसएस अब्राहम लिंकन और तीन मिसाइल वाले विध्वंसक जहाज (डिस्ट्रॉयर) दो हफ्ते पहले ही मध्य पूर्व पहुंच चुके हैं। यूएसएस फोर्ड के लिए यह एक अचानक बदलाव है। पिछले साल अक्टूबर में ट्रंप ने इसे भूमध्य सागर से कैरेबियन भेजा था। उस समय वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए वहां बड़ी सैन्य मौजूदगी तैयार की गई थी।
व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
यह कदम ट्रंप की उस सुरक्षा रणनीति से अलग नजर आता है, जिसमें उन्होंने दुनिया के दूसरे हिस्सों के बजाय पश्चिमी गोलार्ध पर ज्यादा ध्यान देने की बात कही थी। इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप ने एक्सियोस को बताया था कि वह मध्य पूर्व में एक और युद्धपोत भेजने के बारे में सोच रहे हैं। फिलहाल व्हाइट हाउस ने इस मामले पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।
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