यूएसआईएसपीएफ ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ई-कॉमर्स आकर्षक है। यह क्षेत्र 2021 तक 84 अरब डॉलर (6 लाख करोड़ रुपये) पर पहुंच सकता है। ऐसे में सरकार से ई-कॉमर्स पर एक फीसदी टीडीएस लगाने के फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए।
इस फैसला से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के विक्रेताओं को परेशानी होगी और आखिरकार इसका बोझ ग्राहकों पर ही पड़ेगा। वहीं, अमेरिका-भारत कारोबार परिषद (यूएसआईबीसी) ने कहा कि वित्तमंत्री ने विदेशी निवेश बढ़ाने और मेक इन इंडिया में तेजी लाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। बजट में लाभांश वितरण कर (डीडीटी) को खत्म करना अच्छा कदम है। इससे विदेशी कंपनियों को भारत में कारोबार लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
समावेशी और विकास उन्मुख बजट
अमेरिका-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष करूण ऋषि ने कहा कि भारत राजकोषीय बाधाओं के दबाव में है। ऐसे में रक्षा और ऑटो मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को मजबूत करना होगा क्योंकि ये दोनों क्षेत्र भारत के विकास के महत्वपूर्ण कारक हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के रक्षा उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए संशाधनों में अधिक-से-अधिक निवेश की जरूरत है। ऑटो मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी तेजी लानी होगी। उन्होंने बजट को समावेशी, विकास उन्मुख और परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि यह भारत को 50 खबर डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सरकार की मंशा को प्रदर्शित करता है।