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US: हिंदूफोबिया और मंदिरों पर हमलों की निंदा का प्रस्ताव, भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने किया समर्थन

Tue, 02 Jun 2026 12:21 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक योगदान को मान्यता देने वाले प्रस्ताव का अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी किया। इसे डेमोक्रेट सांसद श्री थानेदार ने पेश किया था। प्रस्ताव में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ते पूर्वाग्रह, भेदभाव, घृणा अपराधों और मंदिरों पर हमलों की निंदा की गई है।
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अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/facebook/RepRoKhanna
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विस्तार
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अमेरिका के एक प्रमुख सांसद ने प्रतिनिधि सभा के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें हिंदू-अमेरिकी समुदाय के देश की अर्थव्यवस्था में योगदान का सम्मान किया गया है। इसके साथ ही हिंदूफोबिया, हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह और मंदिरों पर हमलों की निंदा की गई है। इस प्रस्ताव का समर्थन सोमवार को डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने किया। इसे मिशिगन से भारतीय मूल के डेमोक्रेट सांसद श्री थानेदार ने पेश किया था।

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24 जनवरी 2025 को पेश किए गए इस प्रस्ताव को अब तक 32 सांसदों का समर्थन मिल चुका है। इनमें राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम भी शामिल हैं। कैलिफोर्निया का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस प्रस्ताव के समर्थन की घोषणा की।

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प्रस्ताव को लेकर क्या बोले रो खन्ना?
रो खन्ना ने अपनी पोस्ट में कहा, “मुझे सांसद श्री थानेदार के विधेयक H.Res.69 का सह-प्रायोजक बनने पर गर्व है। यह प्रस्ताव अमेरिका में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के निरंतर योगदान और उसकी जीवंत विविधता का सम्मान करता है, जबकि हम अपने देश के बहुजातीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं।”

प्रस्ताव में कहा गया है कि हिंदू धर्म दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है, जिसके 100 से अधिक देशों में 1.2 अरब से ज्यादा अनुयायी हैं। इसमें जिक्र किया गया है कि हिंदू धर्म विभिन्न परंपराओं और आस्था प्रणालियों का समूह है, जो स्वीकार्यता, पारस्परिक सम्मान और शांति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देता है।

अमेरिका ने 40 लाख से ज्यादा हिंदुओं का किया स्वागत
प्रस्ताव के अनुसार, 1900 के दशक से अमेरिका ने दुनिया भर से 40 लाख से अधिक हिंदुओं का स्वागत किया है, जो विभिन्न नस्लीय, भाषाई और जातीय पृष्ठभूमियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें कहा गया है कि हिंदू-अमेरिकियों के योगदान से अमेरिका को उसकी अर्थव्यवस्था और लगभग हर उद्योग क्षेत्र में लाभ मिला है।

प्रस्ताव में रेखांकित किया गया है कि हिंदू-अमेरिकियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विभिन्न उद्योगों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वहीं, हिंदू परंपराओं और प्रथाओं ने दर्शन, आयुर्वेद, कला, संगीत, नृत्य, फैशन, ध्यान, योग और सामुदायिक सेवा के माध्यम से अमेरिकी समाज को समृद्ध बनाया है।

हिंदूफोबिया समेत इन मामलों की निंदा
अमेरिका में बढ़ते हिंदूफोबिया, हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह, नफरत और असहिष्णुता की निंदा करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि सकारात्मक योगदान के बावजूद हिंदू-अमेरिकियों को उनकी विरासत और प्रतीकों को लेकर रूढ़िवादी धारणाओं तथा भ्रामक सूचनाओं का सामना करना पड़ता है। वे स्कूलों और कॉलेज परिसरों में उत्पीड़न, भेदभाव, घृणास्पद भाषण और पूर्वाग्रह से प्रेरित अपराधों का भी निशाना बनते हैं।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि महात्मा गांधी और उनकी शिक्षाओं का प्रभाव मार्टिन लूथर किंग जूनियर पर पड़ा था। किंग ने स्वीकार किया था कि हिंदू दर्शन से निकली अहिंसक सविनय अवज्ञा की शिक्षाओं ने अमेरिका के नागरिक अधिकार आंदोलन पर सकारात्मक प्रभाव डाला।

प्रस्ताव में किया गया नफरती अपराधों का जिक्र 
संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की 'हेट क्राइम्स स्टैटिस्टिक्स रिपोर्ट' का हवाला देते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि मंदिरों और व्यक्तियों को निशाना बनाने वाले हिंदू विरोधी घृणा अपराधों में हर साल वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही अमेरिकी समाज में हिंदूफोबिया भी बढ़ रहा है।
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प्रस्ताव में अमेरिका में हिंदुओं और हिंदू धर्म के ऐतिहासिक तथा निरंतर योगदान का सम्मान किया गया है। साथ ही अमेरिका की विविधता को समृद्ध बनाने में हिंदू संस्कृति की भूमिका को मान्यता दी गई है और हिंदू-अमेरिकियों के स्वागत के प्रति देश की प्रतिबद्धता दोहराई गई है।

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