अमेरिका ने यूएनएससी में परिवर्तन की वकालत की है। बुधवार को अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता जेड तरार ने कहा कि यह UNSC में बदलाव का समय है। यह एक कठिन और लंबी प्रक्रिया है, लेकिन बाइडन-सरकार में ऐसा कोई नहीं है जो कहता हो कि वे परिवर्तन नहीं देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका यूएनएससी में परिवर्तन का समर्थन करता है। गौरतलब है कि भारत UNSC में एक स्थायी सीट की वकालत करता रहा है। सुरक्षा परिषद के अधिकांश देश भारत के समर्थन में भी हैं।
आगे उन्होंने अमेरिका की जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) के निदेशक द्वारा कोरोना वायरस को लेकर किए गए दावे पर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता जेड तरार ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बुधवार को कहा कि यह अकेली महामारी नही है, जो आई है। भविष्य को लेकर संभावना जताते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में कई और महामारी आ सकती हैं। ऐसे में बाइडन सरकार भविष्य में आने वाली महामारियों से निपटने के लिए तैयारी कर रही है।
एफबीआई ने क्या किया दावा?
इससे पहले, FBI के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने कोरोना वायरस को लेकर कहा कि ब्यूरो का मानना है कि कोविड-19 एक 'चीनी सरकार-नियंत्रित प्रयोगशाला' में तैयार किया गया है। इसकी सबसे ज्यादा संभावना है। क्रिस्टोफर ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, 'एफबीआई ने काफी समय से यह आकलन किया है कि महामारी की उत्पत्ति एक संभावित प्रयोगशाला घटना है।
कोरोनावायरस फैलने के बाद FBI की तरफ से पहली बार इस तरह का आधिकारिक बयान दिया गया है। हालांकि, चीन ने पहले ही इस तरह के आरोपों को खारिज कर दिया है। क्रिस्टोफर के इस बयान से एक दिन पहले ही चीन में अमेरिका के राजदूत ने कोरोनावायरस को लेकर चीन को 'अधिक ईमानदार' होने के लिए कहा था।
FBI चीफ ने और क्या कहा?
मंगलवार को दिए इंटरव्यू में FBI चीफ ने कहा, 'चीन वैश्विक महामारी के स्रोत की पहचान करने के प्रयासों को विफल करने और बाधित करने की पूरी कोशिश कर रहा है। यह सभी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि ये वायरस चीन के वुहान स्थित लैब में तैयार की गई। यहां से ये वायरस जानवरों तक पहुंची और फिर जानवरों से इंसानों में आ गई।'
उन्होंने कहा, वुहान में दुनिया की अग्रणी वायरस प्रयोगशारा वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी है। यहीं पर कोरोनावायरस को लेकर शोध चल रहा था। इससे महज 40 मिनट की दूरी पर सी फूड और मांस का बाजार है। अधिक संभावना है कि वायरस के लीक होने के बाद इसी बाजार के जरिए आम लोगों में इसका प्रसार होने लगा।