फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ईरान के तेल के जहाजों पर प्रतिबंध: कंपनियों पर कार्रवाई, क्या तेहरान की कमाई रोक पाएगा अमेरिका? पलटवार पर नजर

Fri, 09 Oct 2026 07:41 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार और प्रतिबंधों से बचने के कथित नेटवर्क पर दबाव बढ़ाते हुए 27 कंपनियों, छह व्यक्तियों और 22 जहाजों को निशाना बनाया है। ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत की गई इस कार्रवाई में तेल टैंकरों, समुद्री प्रबंधन कंपनियों और व्यापारिक फर्मों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
विज्ञापन
अमेरिकी वित्त मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए नए प्रतिबंधों का एलान किया है। इस बार निशाने पर 27 कंपनियां, छह व्यक्ति और 22 जहाज हैं। ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई का मकसद ईरान के तेल कारोबार पर चोट करना, उसकी कमाई के रास्ते बंद करना और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क को तोड़ना है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब वह ईरान की तेल बिक्री और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क पर शिकंजा कसने में जुटा है।
विज्ञापन


तेल से होने वाली कमाई रोकना चाहता है अमेरिका
अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ताजा प्रतिबंधों का मकसद ईरानी शासन की उन कमाई के स्रोतों को बंद करना है, जिनका इस्तेमाल वह क्षेत्र में युद्ध और अन्य गतिविधियों के लिए करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के तेल कारोबार में मदद करने वालों की पहचान करता रहेगा और उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। बेसेंट ने कहा, 'वित्त मंत्रालय तेहरान के अत्याचारी शासन से वह पैसा छीन रहा है, जिसका इस्तेमाल वह क्षेत्र में युद्ध छेड़ने के लिए करता है। हम उन लोगों को बेनकाब करते रहेंगे, जो शासन की तेल बिक्री में मदद करते हैं। ईरान को प्रतिबंधों से बचाने वाले किसी भी व्यक्ति को यह नहीं मानना चाहिए कि वह अमेरिकी वित्त मंत्रालय की कार्रवाई से बच जाएगा।' 

क्या है ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट?
अमेरिका की इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत अंजाम दिया गया है। इस अभियान की घोषणा बेसेंट ने 24 अगस्त 2026 को की थी। इसका मकसद ईरान के वित्तीय नेटवर्क, तेल की बिक्री और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल होने वाले रास्तों को निशाना बनाना है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस अभियान के जरिए ईरान की उन कमाई पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है, जो प्रतिबंधों के बावजूद तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार से हासिल की जाती है। साथ ही, उन कंपनियों और नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ाया जा रहा है, जो इस कमाई को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने या छिपाने में मदद करते हैं।
विज्ञापन


ईरान के गुप्त तेल बेड़े पर सीधा हमला
ताजा प्रतिबंधों का सबसे अहम हिस्सा ईरान के उस समुद्री बेड़े को निशाना बनाना है, जिसका इस्तेमाल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को दूसरे देशों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। इसे 'शैडो फ्लीट' यानी छाया बेड़ा कहा जाता है। इसमें ऐसे पुराने टैंकर और जहाज शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल तेल की ढुलाई के दौरान प्रतिबंधों से बचने और कारोबार की असली जानकारी छिपाने के लिए किया जाता है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि इस कार्रवाई में जहाजों का संचालन करने वाली कंपनियों, समुद्री प्रबंधन फर्मों और व्यापारिक कंपनियों को निशाना बनाया गया है। इनका नेटवर्क तुर्किये, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और मार्शल आइलैंड्स समेत कई देशों तक फैला हुआ है। अमेरिका के मुताबिक, ईरान अपने तेल कारोबार को जारी रखने के लिए इसी नेटवर्क पर काफी हद तक निर्भर है। इसके जरिए वह अरबों डॉलर के पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद विदेशी बाजारों तक पहुंचाता है।

22 जहाजों पर प्रतिबंध, कई तरह के तेल की होती थी ढुलाई
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के बयान में बताया गया है कि प्रतिबंधों की सूची में कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG), रसायनों और बिटुमेन की ढुलाई करने वाले टैंकर शामिल हैं। ये जहाज अलग-अलग देशों के झंडे के तहत चलते थे। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का दावा है कि इन जहाजों के जरिए ईरान का कच्चा तेल, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद दक्षिण एशिया तथा पूर्वी एशिया के बाजारों तक पहुंचाए गए। विभाग के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और अलग-अलग देशों में पंजीकृत जहाजों का इस्तेमाल ईरान के समुद्री कारोबार का असली पैमाना छिपाने और प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता था।

'ईरान के तेल नेटवर्क को बड़ा झटका'
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने दावा किया है कि ताजा कार्रवाई से ईरान के बचे हुए छाया बेड़े के बड़े हिस्से को निष्क्रिय करने में मदद मिलेगी। विभाग के एक अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि यह कार्रवाई ईरान के बचे हुए अवैध समुद्री ढांचे पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार है। अधिकारी के मुताबिक, इस कदम से ईरान के तेल परिवहन नेटवर्क की बड़ी क्षमता प्रभावित होगी। हालांकि, यह अमेरिकी प्रशासन का आकलन है कि प्रतिबंधों का असर कितना व्यापक होगा और ईरान अपने तेल कारोबार के लिए दूसरे रास्ते तलाश पाएगा या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

बिटुमेन से लेकर नैफ्था तक, इन जहाजों पर खास नजर
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने प्रतिबंधों के दायरे में आए कई जहाजों के नाम और उनकी गतिविधियों का भी ब्योरा दिया है।
  • पारितोष: कोमोरोस के झंडे के तहत चलने वाले इस टैंकर ने अमेरिकी विभाग के मुताबिक, 2026 में ईरान से 1 लाख बैरल से अधिक बिटुमेन या डामर की ढुलाई की।
  • बिटू: पनामा के झंडे वाला यह जहाज 2026 में ईरान से 1.70 लाख बैरल से अधिक बिटुमेन या डामर ले गया।
  • स्टारवे: पनामा में पंजीकृत इस जहाज ने 2025 से अब तक 30 लाख बैरल से अधिक ईरानी नैफ्था की ढुलाई की।
  •  गैस लकी: बहामास के झंडे वाला यह एलपीजी टैंकर 2025 से अब तक 5 लाख बैरल से अधिक ईरानी एथिलीन ले जा चुका है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन जहाजों के जरिए अलग-अलग पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की ढुलाई की गई। विभाग ने इन्हें ईरान के तेल कारोबार से जुड़े उस नेटवर्क का हिस्सा बताया है, जिस पर प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है।

दो जहाजों को प्रतिबंधों की सूची से हटाया भी गया
अमेरिका ने जहां नए जहाजों और कंपनियों पर कार्रवाई की है, वहीं दो जहाजों को प्रतिबंधों की सूची से हटाने का फैसला भी किया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, हकुना मटाटा और पिनोच्चियो को सूची से बाहर कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि जांच में पता चला कि ये दोनों जहाज ईरान के छाया बेड़े से अलग हो चुके थे और इन्हें ऐसे नए संचालकों को बेच दिया गया था, जो प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते या अमेरिका के साथ कारोबार करने के लिहाज से स्वीकार्य हैं।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की अलग-अलग कार्रवाई
इस पूरे अभियान में अमेरिकी वित्त मंत्रालय के साथ विदेश मंत्रालय ने भी कदम उठाए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ईरान से जुड़े पेट्रोलियम या पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में शामिल 10 संस्थाओं, छह व्यक्तियों और पांच जहाजों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिका ईरान की आर्थिक ताकत के स्रोतों को काटने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक, दोनों तरह के उपाय अपना रहा है। पिगॉट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने अलग से ईरान के कथित छाया बेड़े से जुड़ी 17 संस्थाओं और जहाजों पर भी कार्रवाई की। दोनों विभागों की कार्रवाइयां ईरान के तेल कारोबार, समुद्री परिवहन और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा हैं।

प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं की अमेरिका में मौजूद संपत्ति या संपत्ति से जुड़े हितों को फ्रीज करना होगा। अमेरिकी नागरिकों या संस्थाओं के कब्जे में ऐसी संपत्ति होने पर भी उसे रोकना और ओएफएसी को इसकी जानकारी देना जरूरी है। ये पाबंदियां उन कंपनियों पर भी लागू हो सकती हैं, जिनमें प्रतिबंधित व्यक्ति या संस्थाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 50 फीसदी या उससे अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। यानी कोई कंपनी खुद प्रतिबंध सूची में शामिल न हो, फिर भी प्रतिबंधित पक्षों की हिस्सेदारी के कारण उस पर रोक लागू हो सकती है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अमेरिकी और विदेशी व्यक्तियों या कंपनियों को दीवानी और आपराधिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, प्रतिबंधित पक्षों के साथ कुछ खास तरह के लेन-देन में शामिल विदेशी वित्तीय संस्थानों पर भी अलग से प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

ये भी पढ़ें: कैप्टन स्मित को इस्राइल में बड़ा सम्मान: फ्लाईदुबई विमान में बहादुरी के लिए भारतीय पायलट को मिलेगा खास अवॉर्ड
विज्ञापन


ईरान के साथ कारोबार करने वालों के लिए बढ़ा जोखिम
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मकसद सिर्फ ईरान को सजा देना नहीं, बल्कि उसके व्यवहार में बदलाव लाना भी है। विभाग ने चेतावनी दी है कि वह प्रतिबंधों से बचने की कोशिशों पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित नेटवर्क के खिलाफ आगे भी कार्रवाई करेगा। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाली कंपनियों के लिए अब जोखिम और बढ़ गया है। खास तौर पर उन कारोबारियों, शिपिंग कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर दबाव बढ़ सकता है, जिन पर ईरानी तेल की ढुलाई, उसकी बिक्री या भुगतान को छिपाने में मदद करने का आरोप है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें