भारतीय मूल की वेंकटा वसमसेट्टी को अमेरिकी इमिग्रेशन एवं कस्टम्स एन्फोर्समेंट यानी आईसीई ने हिरासत में लिया है। वसमसेट्टी वर्ष 1999 में अमेरिका गई थीं और करीब 27 साल से वहीं रह रही थीं। वर्ष 2013 से वह ग्रीन कार्ड धारक हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ निर्वासन की कार्रवाई शुरू हुई थी। परिवार के लिए मामला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि इमिग्रेशन कोर्ट कुछ महीने पहले ही उनके खिलाफ चल रहा निर्वासन मामला खारिज कर चुका था।
मामले की शुरुआत वर्ष 2022 की एक यात्रा से जुड़ी है। वसमसेट्टी अपने बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए भारत आई थीं। इसी दौरान वह कोविड से संक्रमित हो गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उनकी अमेरिका वापसी में देरी हुई। वह करीब सात महीने बाद फरवरी 2023 में अमेरिका लौटीं। अमेरिकी सरकार ने लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहने को इस सवाल से जोड़ा कि क्या उन्होंने अमेरिका में अपना स्थायी निवास छोड़ दिया था।
क्या भारत में लंबे समय तक रुकना ही उनके लिए कानूनी परेशानी बना?
वसमसेट्टी के परिवार और उनकी कानूनी टीम का कहना है कि भारत में रहने के दौरान भी उनका अमेरिका से संबंध बना हुआ था। उनके मुताबिक, अमेरिका में उनका घर, नौकरी और पारिवारिक संबंध मौजूद थे। यानी भारत में लंबे समय तक रुकने के बावजूद उनका इरादा अमेरिका में अपना स्थायी निवास छोड़ने का नहीं था। इसी मामले में उनके खिलाफ निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।
फिर इमिग्रेशन कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
वसमसेट्टी के वकील के अनुसार, सरकार तय समयसीमा में उनके खिलाफ जरूरी सबूत पेश नहीं कर सकी। इसके बाद 19 मई 2026 को इमिग्रेशन जज ने उनके खिलाफ चल रहा निर्वासन का मामला खारिज कर दिया। कानूनी टीम का कहना है कि इस फैसले के बाद भी वसमसेट्टी वैध स्थायी निवासी बनी रहीं। इसके बावजूद उन्हें आईसीई के साथ नियमित चेक-इन के लिए बुलाया जाता रहा।
नियमित चेक-इन के दौरान क्या हुआ?
11 अगस्त को वसमसेट्टी नॉर्थ कैरोलिना के शार्लोट स्थित आईसीई कार्यालय में नियमित चेक-इन के लिए पहुंचीं। इसी दौरान अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें जॉर्जिया के इरविन काउंटी डिटेंशन सेंटर ले जाया गया। परिवार और उनकी कानूनी टीम ने उनकी रिहाई के लिए संघीय अदालत का रुख किया है। मामला अब अदालत में कानूनी चुनौती के दौर में है।