अमेरिका में जून के आखिरी पांच दिनों में आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) ने 10,000 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के बड़े निर्वासन (डिपोर्टेशन) अभियान का हिस्सा है। आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार से मंगलवार के बीच हर दिन लगभग 2,000 गिरफ्तारियां हुई हैं। यह संख्या पिछले महीनों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
रणनीति में बड़ा बदलाव
प्रशासन ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। पहले बड़े शहरों में शोर-शराबे के साथ छापेमारी की जाती थी, लेकिन अब यह काम बहुत शांति से किया जा रहा है। हालांकि ये गिरफ्तारियां किन जगहों पर हुई हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक बयान में कहा है कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के वादे को पूरा कर रहे हैं। उनका मकसद अपराधिक गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार करना और उन्हें देश से बाहर निकालना है। विभाग ने साफ संदेश दिया है कि जो लोग अवैध रूप से देश में आएंगे, उन्हें ढूंढकर वापस भेजा जाएगा।
हिरासत केंद्रों में बढ़ी भीड़
जून के महीने में हिरासत केंद्रों में रखे गए लोगों की संख्या भी बढ़कर 39,000 हो गई है। फरवरी से यह संख्या लगभग 30,000 के आसपास बनी हुई थी। हालांकि ICE अपनी गिरफ्तारियों का डेटा सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन जानकारों का कहना है कि 2,000 गिरफ्तारियां प्रतिदिन होना एक बहुत बड़ा उछाल है। इससे पहले दिसंबर में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां हुई थीं, तब भी औसत 1,283 प्रतिदिन ही था। जनवरी में यह औसत 1,212 था।
पुरानी घटनाओं से लिया सबक
जनवरी में जब मिनीपोलिस और उसके आसपास के इलाकों में भारी संख्या में अधिकारी तैनात किए गए थे, तब विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन ने अपनी कार्यशैली बदली। बॉर्डर जार टॉम होमन ने मिनेसोटा में अधिकारियों की संख्या कम कर दी थी। उस समय होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम और बॉर्डर पेट्रोल प्रमुख ग्रेगरी बोविनो के नेतृत्व में अक्सर प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच झड़पें होती थीं।
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नए नेतृत्व का शांत तरीका
क्रिस्टी नोएम को हटाए जाने के बाद मार्कवेन मुलिन को नया सचिव बनाया गया। मुलिन ने संकेत दिया था कि वह सुर्खियों से दूर रहकर काम करेंगे। उनका लक्ष्य विभाग को विवादों से बचाना है, लेकिन साथ ही ट्रंप की प्राथमिकताओं को पूरी मजबूती से लागू करना है। अब यह नई रणनीति काम करती दिख रही है, जहां बिना किसी हंगामे के गिरफ्तारियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। यह अभियान अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और प्रभावी नजर आ रहा है।