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अमेरिकी सदन में चीन के खिलाफ प्रस्ताव पास, दलाईलामा के मामले में हस्तक्षेप पर प्रतिबंध की धमकी

Wed, 29 Jan 2020 01:43 PM IST
देव कश्यप एएनआई, वॉशिंगटन
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Dalai Lama - फोटो : ANI
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अमेरिकी संसद के निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) ने तिब्बत में मानवाधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के लिए वाशिंगटन के समर्थन को मजबूत करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। विधेयक में कहा गया कि तिब्बत में धार्मिक नेता के चयन का अधिकार चीन सरकार के बजाय तिब्बतियों को होगा।

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इसके मुताबिक यदि बीजिंग ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी चयन में दखल दिया तो उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। सांसद जेम्स पी. मैकगवर्न द्वारा प्रस्तुत चीन की मुश्किलें बढ़ाने वाला यह कानून 22 के मुकाबले 392 मतों से पारित हो गया। अब तक चीन तिब्बत की राजधानी ल्हासा में अमेरिका या अन्य देशों को उसकी अनुमति के बिना राजनयिक केंद्र स्थापित करने से रोकता रहा है लेकिन यह कानून इसे भी सही नहीं मानता है।

तिब्बत में नागरिक व धार्मिक आजादी के संरक्षण के लिए प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने कहा, मैं 2019 के तिब्बती नीति अधिनियम के समर्थन में हूं और हम बीजिंग को स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि उन्हें तिब्बत के धार्मिक व सांस्कृतिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन ने क्रूरतापूर्वक तिब्बती लोगों के खिलाफ अपने अपमानजनक हमले को तेज कर दिया है। 
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पुनर्जन्म संबंधी चयन प्रक्रिया को बाधित न करे चीन
अमेरिकी संसद में पारित विधेयक के मुताबिक यदि चीन दलाई लामा के 15वें उत्तराधिकारी चयन में पुनर्जन्म संबंधी मान्यता प्रक्रिया को बाधित करता है तो अमेरिका चीनी अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय व यात्रा प्रतिबंध भी लगा सकता है। बता दें कि चीन दलाई लामा के 15वें उत्तराधिकारी का चयन तिब्बतियों की धार्मिक मान्यता के बजाय खुद थोपना चाहता है। 

तिब्बती नेताओं से वार्ता को बढ़ावा देता है विधेयक
प्रतिनिधि सभा अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने कहा कि वाशिंगटन तिब्बती लोगों की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने व तिब्बती पठार पर पर्यावरण सुरक्षा के लिए वैश्विक सरकारों और व्यापारिक समुदाय के साथ काम कर रहा है। यह अस्वीकार्य है कि चीन सरकार अब भी तिब्बती नेताओं के साथ वार्ता से इनकार करती है। यह कानून तिब्बती नेताओं और बीजिंग के बीच वार्ता को प्रोत्साहित करता है।

चीन ने जताई नाराजगी
अमेरिकी संसद द्वारा पारित तिब्बत नीति और समर्थन अधिनियम 2019 को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि अमेरिका ने ऐसा करके अंतरराष्ट्रीय कानून और रिश्तों के बुनियादी मानदंडों का उल्लंघन किया है। चीन ने इसे उसके आंतरिक मामलों में दखल बताया। उन्होंने कहा, चीन इस बात से नाराज है कि अमेरिका ने तिब्बती स्वाधीनता संबंधी ताकतों को गलत संकेत भेजा है।

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