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US-Greenland ROW: आर्कटिक सुरक्षा पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ बातचीत शुरू; अमेरिकी विदेश मंत्री का दावा

Thu, 29 Jan 2026 02:03 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत शुरू हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इसे एक नियमित और सुव्यवस्थित प्रक्रिया बताया।

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मार्को रुबियो, अमेरिकी विदेश मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत की शुरुआत हो गई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया नियमित रूप से आगे बढ़ेगी और इसका उद्देश्य सभी पक्षों के बीच मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना है। 

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रूबियो ने सीनेट की विदेश मामलों की समिति के समक्ष गवाही देते हुए कहा यह बातचीत आज से शुरू हो रही है और इसे इस तरह आगे बढ़ाया जाएगा कि हर बैठक मीडिया तमाशा न बने, ताकि दोनों पक्ष खुले मन से सकारात्मक समाधान तक पहुंच सकें।

यूरोप से रिश्ते सुधरने की उम्मीद
रूबियो ने यूरोप के साथ रिश्तों को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए कहा हमें अभी थोड़ा काम करना है, लेकिन मुझे लगता है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और जल्द ही यूरोपीय सहयोगियों से भी यही सुनने को मिलेगा।
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ग्रीनलैंड पर टिप्पणी को लेकर सवाल
सुनवाई के दौरान सीनेटर टिम केन ने ट्रंप द्वारा दावोस में ग्रीनलैंड को गलती से ‘आइसलैंड’ कहे जाने पर सवाल उठाया। इस पर रूबियो ने हल्के अंदाज में कहा कि राष्ट्रपति से जुड़ी ऐसी मौखिक चूकें पहले भी होती रही हैं और इसे ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है।

ये भी पढ़ें:- US-Iran Tension: 'बातचीत नहीं तो हमला तय', ट्रंप की ईरान को खुली धमकी, बोले- अगली कार्रवाई और भी भयानक होगी

ट्रंप के बयानों के बाद बढ़ा तनाव
यह कार्य समूह उस समय बनाया गया, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन से संभावित खतरों का हवाला देते हुए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। हालांकि, ग्रीनलैंड, डेनमार्क और यूरोपीय देशों ने इन बयानों को सख्ती से खारिज कर दिया था, जिससे अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में खटास आ गई थी।

वार्ता से संबंध सुधारने की कोशिश
हाल के हफ्तों में ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और डेनमार्क पर टैरिफ लगाने की धमकी के बाद ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में तनाव देखने को मिला था। हालांकि, बाद में नाटो महासचिव मार्क रूटे की मध्यस्थता से खनिज संसाधनों से भरपूर इस द्वीप तक पहुंच को लेकर एक प्रारंभिक समझौता बना, जिसके बाद अमेरिका ने अपने सख्त रुख में नरमी दिखाई।
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सैन्य विकल्प पर भी नरमी
विश्व आर्थिक मंच (दावोस) में ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए अमेरिकी सैन्य बल के इस्तेमाल का विकल्प अब एजेंडे से बाहर है। इसके बाद बाजारों में आई गिरावट और संभावित व्यापार युद्ध की आशंकाओं ने भी अमेरिकी प्रशासन को अपने रुख पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया।

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