अमेरिकी विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर हैं कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन संकट को लंबा खींचने पर आमादा हैं। यहां के सुरक्षा और सैन्य हलकों की समझ है कि पुतिन समस्या का कूटनीतिक समाधान निकालने की इच्छा जरूरत जता रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने युद्ध की तैयारी भी जारी रखी है। यानी उन्होंने अपने सारे विकल्प खुले रखे हैं।
रूस दोनबास की स्थिति को लगातार चर्चा में रखे हुए है। इस बारे में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा है कि रूस ऐसी बातें यूक्रेन पर हमला करने का बहाना तैयार करने के लिए कह रहा है। अमेरिकी विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि दोनबास को लेकर पुतिन की शिकायतें नई नहीं हैं। दोनबास इलाके में रूसी मूल के और रूसी भाषा बोलने वाले लोगों की बहुसंख्या है। रूस का आरोप है कि यूक्रेन की सरकार उनका दमन कर रही है।
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण में कहा गया है कि अब पुतिन इस बात को यह संदेश देने के लिए दोहरा रहे हैं कि दोनबास की आबादी के प्रति उनकी जिम्मेदारी है। वे उनकी रक्षा करने के लिए वचनबद्ध हैं। इस टिप्पणी में ध्यान दिलाया गया है कि 2008 में पुतिन ने जॉर्जिया पर भी आरोप लगाया था कि वह दक्षिण ओसेतिया इलाके में नरसंहार कर रहा है। इसी को बहाना बना कर रूस ने वहां हमला किया और दक्षिण ओसेतिया के जॉर्जिया से अलगाव में मददगार बना।
रूस की एक प्रमुख एजेंसी- इन्वेस्टिगेटिव कमेटी पिछले हफ्ते ही दोनबास में ‘अंधाधुंध गोलाबारी’ के आरोप की जांच शुरू कर चुकी है। उसने कहा है कि ये जांच रूस की आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 356 के प्रथम भाग के तहत की जा रही है। ये धारा असैनिक आबादी के खिलाफ ऐसे व्यवहार से जुड़ी है, जिसका अंतरराष्ट्रीय कानून में निषेध है। अमरिकी टीकाकारों ने इस जांच को दोनबास पर हमला करने की रूस की तैयारी के रूप में देखा है।