यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के साथ कथित मानवाधिकार हनन के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों के बाद यूरोपीय देशों का यह संघ अमेरिका के और करीब आ गया है। चीन का मुकाबला करने के लिए अब अमेरिका और ईयू ने गहन सहयोग को लेकर औपचारिक वार्ता शुरू करने के लिए एक समझौता किया है।
इस सहयोग समझौते में नाटो देशों के अलावा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक देशों को शामिल करना शामिल है।
यूरोपीय आयोग के उपाध्यक्ष और विदेशी मामलों में ईयू के प्रमुख जोसेप बोरेल ने पुष्टि की है कि हमने पारस्परिक आर्थिक मुद्दों, लचीलापन, मानवाधिकार, सुरक्षा बहुपक्षवाद और चीन के साथ रचनात्मक जुड़ाव के क्षेत्रों जैसे विषयों पर वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ स्तर पर बैठकें जारी रखने का फैसला किया है।
आयोग के मुताबिक, हम एक चीन की भूमिका का मूल्यांकन एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में साझा करने पर सहमत हुए हैं। यह सहमति ईयू और अमेरिका के बीच वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इस बीच, बेल्जियम में मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा है कि दोनों देशों को संवाद में चीन की चुनौतियों का मुकाबला एकजुट होकर करना जरूरी है।
यूरोप से चीनी समझौते में खटास
चीन के खिलाफ ब्रिटेन, कनाडा, ईयू और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से यह संकेत मिलता है कि बाइडन प्रशासन बीजिंग से मुकाबला करने के लिए गठबंधन बनाने में जुटा हुआ है। चीन के खिलाफ बन रहे इस बड़े गठबंधन को देखते हुए बीजिंग भी बौखला गया है।
उसने 10 यूरोपीय लोगों और चार संस्थाओं के मकाऊ-हांगकांग समेत देश में कहीं भी प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे यूरोप के साथ चीनी निवेश समझौते में खटास आ गई है। इस दबाव के बीच चीन ने शिनजियांग में जबरन श्रम और नरसंहार दोनों को लेकर लगे आरोपों से इनकार किया है।
चीन से तनाव के बीच फिलीपींस ने विवादित टापू पर भेजे और जहाज
दक्षिण चीन सागर में संप्रभुता की रक्षा के लिए फिलीपींस की सेना ने और अधिक नौसैनिक जहाजों को गश्ती का आदेश दिया है। यहां एक विवादित टापू को चारों तरफ से चीनी बेड़े ने घेर लिया है। जबकि इस टापू को छोड़ने की मनीला की मांग को चीन ने अपना क्षेत्र होने का दावा जताते हुए अनदेखा कर दिया है। जबकि फिलीपींस और चीन के इस संघर्ष में अमेरिका ने मनीला का समर्थन करने की घोषणा की है।