मतगणना का इंतजार नहीं!
कोरोना महामारी के कारण बहुत बड़ी संख्या में मतदाता इस बार इस तरीके से मतदान करने वाले हैं। ट्रंप ने टाउन हॉल कार्यक्रम में एक बार फिर संभावित चुनावी धोखाधड़ी का मुद्दा उठाया। तब उनका ध्यान इस एफबीआई (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) के निदेशक क्रिस्फोटर ए.व्रे के इस बयान की तरफ खींचा गया कि व्यापक चुनावी धोखाधड़ी होने के कोई संकेत नहीं हैं। इस पर ट्रंप ने कहा- “इसका मतलब है कि वो (एफबीआई निदेशक) अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं।”
डोनल्ड ट्रंप के ऐसे ही रुख के कारण इस बार राष्ट्रपति चुनाव संशय से घिरा हुआ है। एक संशय यह है कि ट्रंप बिना पूरी मतगणना का इंतजार किए खुद को विजेता घोषित कर सकते हैं।
ओबामाकेयर पर गाज
ट्रंप ने अपने 2016 के चुनाव अभियान के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में 2010 के महत्वपूर्ण ओबामाकेयर को पूरी तरह से रद करने का वादा किया था। अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने सत्ता संभालते ही एक प्रशासनिक आदेश पर हस्ताक्षर कर ओबामाकेयर को कमजोर करने की राह आसान कर दी थी। अब कोविड-19 महामारी जैसे कठिन हालात में वे संसद से पारित ओबामा केयर को कार्यकारी आदेश से बदलना चाहते हैं।
कोरोना रिपोर्ट पर सवाल
इतना ही नहीं ट्रंप पर कोरोना वायरस की निगेटिव रिपोर्ट आए बिना बैठक और रैलियां करने का भी आरोप है। इसके अलावा ट्रंप पर 150 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के भी आरोप लगे हैं और उनके खिलाफ इसकी जांच जारी है।
डोनाल्ड ट्रंप को अपने गैर-जिम्मेदाराना रवैया की वजह से अब अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी में ट्रंप के विरोध अब कहने लगे हैं कि अमेरिकी संविधान निर्माताओं ने ऐसे कमजोर लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं की होगी।
अमेरिकी संविधान का आधार
जानकारों के मुताबिक अमेरिकी संविधान में दो लक्ष्यों को हासिल करने के लिए डिजाइन किया गया था। हालांकि इन लक्ष्यों की प्राप्ति को सुनिश्चित करने की दिशा में उन्हों दो बाधाएं भी नजर आ रही थीं।
लक्ष्य
- एक ऐसे संघीय ढांचे का निर्माण जिससे अमेरिका की सीमाएं सुरक्षित रहें। अमेरिका के सभी राज्यों को प्रगति के समान अवसर मिलें। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक मुद्रा को लागू करने का निर्णय हुआ।
- सभी राज्यों को स्वायत्ता मिले। जिससे लोग जीवन को अपनी संस्कृति के हिसाब से जिएं और उसका आनंद लें। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्यों को सिविल और क्रिमिनल कानून बनाने की स्वतंत्रता दी गई। इस तरह अमेरिका के संघीय ढांचे में राज्य सरकारें बहुत ताकतवर हैं।
शक्ति संतुलन के लिए किए ये उपाय
1787 में अमेरिकी संविधान निर्माताओं ने भीड़ तंत्र और तानाशाही जैसे हालात से बचने के लिए संविधान में सेपरेशन ऑफ पॉवर (शक्ति का अलगाववाद) और चेक्स एंड बैलेंस (नियंत्रण और संतुलन) को जगह दी। सरकारी शक्ति सीधे जनता द्वारा चुने जाने की बजाए बांट दी गई। इसलिए राष्ट्रपति सीधे जनता द्वारा निर्वाचित किए जाने की बजाए जनता के चुने हुए इलेक्टोरेट कॉलेज द्वारा चुने जाते हैं।
राष्ट्रपति सर्वशक्तिमान नहीं
राष्ट्रपति अमेरिका की सैन्य शक्ति का कमांडर इन चीफ होता है। लेकिन इससे वह सर्वशक्तिमान नहीं बन जाता। किसी भी देश पर हमला करने और संधि करने के लिए उसे अमेरिकी सीनेट की मंजूरी लेनी पड़ती है। अगर सुप्रीम कोर्ट को अमेरिकी संसद का बनाया कानून न्याय संगत नहीं लगता है तो वह उसे निरस्त कर सकती है। यह विधायिका और न्यायपालिका के बीच नियंत्रण और शक्ति संतुलन की व्यवस्था है। 1791 में बिल ऑफ राइट्स के जरिए नागरिकों के अधिकार सुरक्षित किए गए। संविधान में जिन शक्तियों का जिक्र नहीं किया गया है, वह राज्य सरकारों या नागरिकों को दी गई हैं।