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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में पहली बार कमजोर लोकतंत्र बना मुद्दा, जानें क्या है अमेरिकी संविधान में व्यवस्था

Sat, 17 Oct 2020 09:59 AM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद बर्नी सैंडर्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे कहा था कि रिपब्लिकन नेता अमेरिकी लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और विज्ञान के प्रति उनकी उपेक्षा ने अर्थव्यवस्था और अमेरिकियों के जीवन को खतरे में डाल दिया है। सैंडर्स ने अगस्त के महीने में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन (डीएनसी) के शुरुआती सत्र को संबोधित करते हुए ये बाते कही थीं। क्या उनकी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अब सच होती हुई दिखाई दे रही हैं? 

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बता दें कि सैंडर्स 2016 में राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के नामांकन के लिए मुख्य प्रत्याशियों में से एक थे। लेकिन वे हिलेरी क्लिंटन से नामांकन का चुनाव हार गए थे। जिसके बाद क्लिंटन ने ट्रंप के खिलाफ चुनाव लड़ा था।  



अब जब राष्ट्रपति चुनाव बहुत दूर नहीं हैं, अमेरिका में कमजोर लोकतंत्र पहली बार मुद्दा बना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चुनाव में मतदान में धांधली होने की बात कही है जिसके बाद अमेरीकियों को लग रहा है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचल रहे हैं। 

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मतगणना का इंतजार नहीं!
कोरोना महामारी के कारण बहुत बड़ी संख्या में मतदाता इस बार इस तरीके से मतदान करने वाले हैं। ट्रंप ने टाउन हॉल कार्यक्रम में एक बार फिर संभावित चुनावी धोखाधड़ी का मुद्दा उठाया। तब उनका ध्यान इस एफबीआई (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) के निदेशक क्रिस्फोटर ए.व्रे के इस बयान की तरफ खींचा गया कि व्यापक चुनावी धोखाधड़ी होने के कोई संकेत नहीं हैं। इस पर ट्रंप ने कहा- “इसका मतलब है कि वो (एफबीआई निदेशक) अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं।” 

डोनल्ड ट्रंप के ऐसे ही रुख के कारण इस बार राष्ट्रपति चुनाव संशय से घिरा हुआ है। एक संशय यह है कि ट्रंप बिना पूरी मतगणना का इंतजार किए खुद को विजेता घोषित कर सकते हैं। 

ओबामाकेयर पर गाज
ट्रंप ने अपने 2016 के चुनाव अभियान के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में 2010 के महत्वपूर्ण ओबामाकेयर को पूरी तरह से रद करने का वादा किया था। अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने सत्ता संभालते ही एक प्रशासनिक आदेश पर हस्ताक्षर कर ओबामाकेयर को कमजोर करने की राह आसान कर दी थी। अब कोविड-19 महामारी जैसे कठिन हालात में वे संसद से पारित ओबामा केयर को कार्यकारी आदेश से बदलना चाहते हैं। 

कोरोना रिपोर्ट पर सवाल
इतना ही नहीं ट्रंप पर कोरोना वायरस की निगेटिव रिपोर्ट आए बिना बैठक और रैलियां करने का भी आरोप है। इसके अलावा ट्रंप पर 150 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के भी आरोप लगे हैं और उनके खिलाफ इसकी जांच जारी है। 

डोनाल्ड ट्रंप को अपने गैर-जिम्मेदाराना रवैया की वजह से अब अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी में ट्रंप के विरोध अब कहने लगे हैं कि अमेरिकी संविधान निर्माताओं ने ऐसे कमजोर लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं की होगी। 

अमेरिकी संविधान का आधार
जानकारों के मुताबिक अमेरिकी संविधान में दो लक्ष्यों को हासिल करने के लिए डिजाइन किया गया था। हालांकि इन लक्ष्यों की प्राप्ति को सुनिश्चित करने की दिशा में उन्हों दो बाधाएं भी नजर आ रही थीं। 

लक्ष्य
  • एक ऐसे संघीय ढांचे का निर्माण जिससे अमेरिका की सीमाएं सुरक्षित रहें। अमेरिका के सभी राज्यों को प्रगति के समान अवसर मिलें। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक मुद्रा को लागू करने का निर्णय हुआ। 
  • सभी राज्यों को स्वायत्ता मिले। जिससे लोग जीवन को अपनी संस्कृति के हिसाब से जिएं और उसका आनंद लें। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्यों को सिविल और क्रिमिनल कानून बनाने की स्वतंत्रता दी गई। इस तरह अमेरिका के संघीय ढांचे में राज्य सरकारें बहुत ताकतवर हैं।
 

डर
  • अमेरिकी संविधान निर्माताओं को इस बात की आशंका थी कि अमेरिका में भी यूरोपीय देशों की तरह राजाओं की तानाशाही न घुस आए। अमेरिका में सरकार का गठन व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए न हो। और व्यक्तिगत फायदे के लिए जनता का शोषण न हो। 
  • लोकतंत्र भीड़ तंत्र में न तब्दील हो जाए। संविधान निर्मताओं की राय में ज्यादातर लोग अपने घर, परिवार और नौकरी से आगे नहीं सोचते हैं। ऐसे में जनता को झांसा देकर कोई भी देश की सत्ता में काबिज हो सकता है। लिहाज उन्हें तानाशाही और संपूर्ण लोकतंत्र का भी डर था। 

शक्ति संतुलन के लिए किए ये उपाय
1787 में अमेरिकी संविधान निर्माताओं ने भीड़ तंत्र और तानाशाही जैसे हालात से बचने के लिए संविधान में सेपरेशन ऑफ पॉवर (शक्ति का अलगाववाद) और चेक्स एंड बैलेंस (नियंत्रण और संतुलन) को जगह दी। सरकारी शक्ति सीधे जनता द्वारा चुने जाने की बजाए बांट दी गई। इसलिए राष्ट्रपति सीधे जनता द्वारा निर्वाचित किए जाने की बजाए जनता के चुने हुए इलेक्टोरेट कॉलेज द्वारा चुने जाते हैं। 
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राष्ट्रपति सर्वशक्तिमान नहीं
राष्ट्रपति अमेरिका की सैन्य शक्ति का कमांडर इन चीफ होता है। लेकिन इससे वह सर्वशक्तिमान नहीं बन जाता। किसी भी देश पर हमला करने और संधि करने के लिए उसे अमेरिकी सीनेट की मंजूरी लेनी पड़ती है। अगर सुप्रीम कोर्ट को अमेरिकी संसद का बनाया कानून न्याय संगत नहीं लगता है तो वह उसे निरस्त कर सकती है। यह विधायिका और न्यायपालिका के बीच नियंत्रण और शक्ति संतुलन की व्यवस्था है। 1791 में बिल ऑफ राइट्स के जरिए नागरिकों के अधिकार सुरक्षित किए गए। संविधान में जिन शक्तियों का जिक्र नहीं किया गया है, वह राज्य सरकारों या नागरिकों को दी गई हैं। 
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