अमेरिका में इस साल नवंबर में राष्ट्रपति पद के चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और जो बिडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी की तैयारी पूरे जोर—शोर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के करीब आते ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय के वोट किस तरफ जाएंगे और ये किस तरह राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करेंगे।
रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी कुर्सी बचाने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन से मुकाबला करते नजर आएंगे। वहीं, जो बिडेन ने भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनकर भारतीय समुदाय के बीच इस चुनावों की जिज्ञासा को और बढ़ा दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अमेरिकी राजनीतिक में भारतीय समुदाय कितना अहम है? किस ढंग से वह चुनावों पर असर डाल सकते हैं?
राष्ट्रपति चुनावों में अब 100 से कम दिन रह गए हैं, इसलिए राष्ट्रपति पद के दोनों ही उम्मीदवार भारतीय मूल के लोगों को रिझाने में लग चुके हैं। ट्रंप और बिडेन को इस छोटे लेकिन प्रभावी समुदाय का पता है। इसलिए दोनों ही नेता इन्हें अपने पाले में करने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं।
इस बात का सबूत डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन द्वारा भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना है। बिडेन को पता है कि हाल ही में, भारतीय मूल के लोगों का वोट रिपब्लिकन की तरफ खिसक रहा है, इसलिए उन्हें ऐसा होने से रोकना होगा।
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दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता भारतीय समुदाय में बढ़ रही है। ट्रंप भी इस बात को बखूबी जानते हैं, इसलिए पिछले साल सितंबर में आयोजित 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम को ट्रंप ने भुनाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस कार्यक्रम में कहना, 'अबकी बार ट्रंप सरकार' इस बात का सबूत है।
वहीं, इस साल फरवरी में 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति का आना और लोगों को संबोधित करना, अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय को संदेश है कि रिपब्लिकन पार्टी उनके साथ खड़ी है। हालांकि, हाल ही में एच-1बी वीजा को लेकर भारतीय अमेरिकी नागरिकों का एक समूह ट्रंप से खासा निराश है।