अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और उनके सहयोगी ब्रायन हुक की सरकारी सुरक्षा वापस ले ली है। इन दोनों को ईरान से धमकियां मिलने के कारण सुरक्षा दी गई थी। दोनों ने ट्रंप के पहले प्रशासन के दौरान ईरान पर सख्त रुख अपनाया था।
मामले से परिचित कांग्रेस के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर इस बदलाव की पुष्टि की, लेकिन इसके पीछे का कारण नहीं बताया। उन्होंने कहा कि पोम्पिओ और हुक को बुधवार को सुरक्षा वापस लिए जाने के बारे में बताया गया। उसी रात 11 बजे सुरक्षा वापस लेने का आदेश प्रभावी हुआ।
किताब लिखने से नाराज ट्रंप ने जॉन बोल्टन की सुरक्षा भी वापस ली थी
यह कदम ट्रंप की वापसी के बाद उन लोगों को निशाना बनाने का संकेत है, जिन्हें वे विरोधी मानते हैं। इससे पहले, ट्रंप ने अपने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की सुरक्षा भी वापस ली थी, जिन्होंने एक किताब लिखी थी, जिससे ट्रंप नाराज थे।
ट्रंप ने उन दर्जनों पूर्व खुफिया अधिकारियों की सुरक्षा मंजूरी भी रद्द की, जिन्होंने 2020 में हंटर बाइडन लैपटॉप मामले को लेकर एक पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
बाइडन प्रशासन ने दी थी 24 घंटे सुरक्षा
बाइडन प्रशासन ने 21 जनवरी, 2021 से पोम्पिओ और हुक को 24 घंटे सुरक्षा प्रदान की थी। ईरान परमाणु समझौते से ट्रंप के हटने के बाद, पोम्पिओ और हुक अमेरिका के अधिकतम दबाव अभियान के प्रमुख चेहरे बने।
सुरक्षा पर हर महीने 2 मिलियन डॉलर से अधिक हो रहा था खर्च
कांग्रेस को मिली जानकारी के अनुसार, विदेश विभाग हर महीने पोम्पिओ और हुक की सुरक्षा पर 2 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च कर रहा था। हालांकि, हाल के दिनों में सुरक्षा की राशि को कम करने का फैसला किया गया।
ट्रंप प्रशासन को दी गई थी सुरक्षा के बारे में जानकारी
बाइडन प्रशासन के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि ईरान द्वारा उत्पन्न खतरे के बारे में जानकारी ट्रंप प्रशासन को पहले से दी गई थी। उन्हें बताया गया था कि पोम्पिओ, हुक और अन्य के लिए सुरक्षा विवरण क्यों बढ़ाया गया था।