अमेरिका का ट्रंप प्रशासन अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करने से पहले संघीय जेलों में रख रहा है। संघीय जेल ब्यूरो ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। ब्यूरो ने एक बयान में कहा कि 'वे बंदियों को रखने के लिए अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन की मदद कर रहे हैं और प्रशासन के नीतिगत उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कानून प्रवर्तन भागीदारों का समर्थन करना जारी रखेंगे।'
हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या बताने से इनकार
हालांकि ब्यूरो ने बंदियों की संख्या बताने से इनकार कर दिया और ये जानकारी भी नहीं दी कि किन जेलों में बंदियों को रखा जा रहा है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अवैध अप्रवासियों को लॉस एंजिलिस, मियामी, अटलांटा, लीवनवर्थ, कंसास, न्यू हैंपशायर और फिलाडेल्फिया की संघीय जेलों में रखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मियामी जेल में ही 500 बंदियों को रखा गया है। बंदियों की संख्या को देखते हुए संघीय जेल ब्यूरो को अपने कई कर्मचारियों को विभिन्न जेलों में स्थानांतरित करना पड़ा है। न्याय विभाग के तहत आने वाले संघीय जेल ब्यूरो में 30 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं। इसके तहत 122 सुविधा केंद्र, 1.55 लाख कैदी आते हैं। इस एजेंसी का बजट करीब 8 अरब डॉलर है।
जेल ब्यूरो पर लोगों से बुरा व्यवहार करने का लगा आरोप
अमेरिका में एक करोड़ से ज्यादा अवैध अप्रवासी हैं, जिनमें से लाखों लोगों को ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित करने की बात कही है। गुरुवार को अवैध अप्रवासियों को लेकर अमेरिकी सेना का एक विमान गुरुवार को क्यूबा के ग्वांतानामो बे नेवल बेस पर उतरा। ग्वांतानामो बे समेत विभिन्न जेलों में अवैध अप्रवासियों को रखे जाने पर नागरिक समूहों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। ट्रंप प्रशासन पर अवैध अप्रवासियों से बुरा व्यवहार करने के आरोप लग रहे हैं। अवैध अप्रवासियों को हाथ-पैरों में हथकड़ियां डालकर जेलों में भेजा जा रहा है, जिसे लेकर लोगों में नाराजगी है। अमेरिका में शरण मांगने वाले लोगों को भी जेल ब्यूरो द्वारा रखा जाता है। लोगों ने जेल ब्यूरो पर बेकार भोजन और खराब दूध उपलब्ध कराने, उनके धार्मिक विश्वास का पालन न करने देने, तेज धूप में सप्ताह में केवल कुछ घंटे मनोरंजन करने की अनुमति देने और पर्याप्त चिकित्सा देखभाल न देने का आरोप लगाया। ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से अमेरिका के आव्रजन विभाग ने 8000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि इनमें से 461 लोगों को चिकित्सा कारणों से रिहा कर दिया गया है।