अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन
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अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान में बने रहने को लेकर चल रही कयासबाजी के बीच रविवार को अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन काबुल पहुंचे। ऑस्टिन की पेंटागन प्रमुख के तौर पर अफगानिस्तान की यह पहली यात्रा है। माना जा रहा है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री ऑस्टिन के दौरे से ही यह तय होगा कि 18 साल के अफगानिस्तान की धरती पर संघर्ष में उलझी अमेरिकी सेना का अगला कदम क्या होगा।
सरकारी नियंत्रण वाले अफगानिस्तान रेडियो व टीवी और मशहूर टोलो टेलीविजन के मुताबिक, भारत का दौरा खत्म करने के बाद ऑस्टिन सीधे काबुल पहुंचे हैं। उनके अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी और इसी सप्ताह कार्यवाहक रक्षा मंत्री नियुक्त किए गए डिफेंस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल यासीन जिया समेत कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करने की संभावना है।
ऑस्टिन की यात्रा इस महीने की शुरुआत में नए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन की तरफ से गनी को लिखे गए तीखे पत्र के बाद हो रही है। ब्लिंकेन ने गनी को लिखे पत्र में कहा था कि अफगानिस्तान में तत्काल शांति बनाना जरूरी है और इसके लिए सभी विकल्प मौजूद हैं। वॉशिंगटन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और तालिबान के बीच पिछले साल हुए शांति समझौते की समीक्षा कर रहा है। अफगानिस्तान में नाटो सेना को बनाए रखने के लिए अमेरिका हर साल 4 अरब डॉलर का भारी खर्च कर रहा है।
एक मई है अमेरिकी सेना की वापसी की समयसीमा
अमेरिका ने अपने आखिरी सैनिक को वापस बुलाने की एक मई की समयसीमा तय की हुई है, लेकिन पिछले सप्ताह एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस समयसीमा को पूरा करना बेहद कठिन बताया था। हालांकि बाइडन ने कहा था कि यदि तालिबान के साथ समझौते में तय की गई समयसीमा को आगे बढ़ाया गया तो भी यह समय बहुत लंबा नहीं रखा जाएगा। इस जवाब में तालिबान ने शुक्रवार को अमेरिका को ऐसा होने पर गलत परिणाम होने की चेतावनी दी थी।
अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की कमान संभाल चुके हैं ऑस्टिन
ऑस्टिन का अफगानिस्तान दौरा मध्यपूर्व के इस अमेरिकी युद्ध मैदान में उनकी पहली वापसी है। वह सैन्य कमांडर के तौर पर अपनी सेवा के दौरान इस क्षेत्र में अमेरिकी सेना का लंबे समय तक नेतृत्व कर चुके हैं। सेवानिवृत्त 4-स्टार जनरल ऑस्टिन अफगानिस्तान में 10वीं माउंटेन डिविजन के कमांडर रहे हैं और 2013-2016 तक वह अमेरिकी सेंट्रल कमान के प्रमुख रहे हैं, जो इराक और अफगानिस्तान में युद्ध से जुड़े फैसले लेती है।