अमेरिका में सरकारी ऋण की सीमा बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन और विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी के बीच बनी सहमति के अनुरूप पेश बिल ने अपनी पहली रुकावट पार कर ली है। गुरुवार सुबह यह बिल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में पास हो गया। लेकिन सदन में हुए मतदान से यह भी सामने आया कि इस विधेयक को लेकर दोनों पक्षों में भारी असंतोष है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों की सहमति से पेश इस बिल के पक्ष में 314 सदस्यों ने मतदान किया, लेकिन इन्हीं पार्टियों के 117 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट डाले।
ऋण सीमा बढ़ाने पर समझौता राष्ट्रपति बाइडन और हाउस में रिपब्लिकन पार्टी के नेता केविन मैकार्थी के बीच हुआ था। इसके तहत बाइडन जन कल्याण योजनाओं और अपनी प्रिय ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं पर खर्च घटाने के लिए सहमत हुए थे। इससे उनकी पार्टी का प्रोग्रेसिव (प्रगतिशील) धड़ा नाराज हो गया है। उधर रिपब्लिकन पार्टी के धुर दक्षिणपंथी धड़े को शिकायत है कि बाइडन प्रशासन को जितना खर्च घटाने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए था, मैकार्थी उससे कम पर ही ऋण सीमा बढ़ाने के बिल को समर्थन देने पर राजी हो गए।
अब यह बिल सीनेट में पेश होगा। पर्यवेक्षकों के मुताबिक वहां भी कई सदस्य इसका विरोध करेंगे। फिर भी बिल के पारित हो जाने की पूरी संभावना है। मगर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के लिए नए कर्जों का रास्ता खुलने के बावजूद अमेरिका का ऋण संकट दूर होने की संभावना नहीं है। यह आशंका बनी हुई है कि अभी भी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां अमेरिकी ऋण की साख घटा दें। इसकी वजह लोगों का अमेरिका सरकार की कर्जों को चुकाने की क्षमता में कमजोर पड़ता भरोसा है।
टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि रेटिंग एजेंसी फिच पहले अमेरिकी कर्ज को रेटिंग वॉच निगेटिव श्रेणी में रख चुकी है। इसका अर्थ यह होता है कि फिच अमेरिकी कर्जों को निगेटिव श्रेणी में डालने से पहले अभी स्थिति की निगरानी कर रही है। दो अन्य एजेंसियों एसएंडपी और मूडीज ने बुधवार को अपना आकलन जारी किया। उन दोनों ने अमेरिकी कर्ज को अभी निगरानी श्रेणी में नहीं रखा है।
फिलहाल बाजार विशेषज्ञों को अंदेशा यह है कि दोनों सदनों से ऋण सीमा बढ़ाने का बिल पारित होते ही अमेरिका का वित्त मंत्रालय अपने पास घटी नकदी की मात्रा को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में बॉन्ड जारी करेगा। अगर उन बॉन्ड्स के खरीदारों की अपेक्षित कतार नहीं लगी, तो बॉन्ड को अधिक ब्याज का वादा करके बेचना पड़ेगा। इससे एक तरफ अमेरिका की वित्तीय साख घटेगी, दूसरी तरफ अमेरिका सरकार पर अधिक ब्याज देने का बोझ पड़ेगा।
वित्तीय कंपनी डीडब्ल्यूएस ग्रुप में फिक्स्ड इनकम विभाग के प्रमुख जॉर्ज केट्राम्बोन ने सीएनएन से कहा कि नए बॉन्ड जारी करने से आर्थिक स्थितियां और कठिन होंगी और बॉन्ड्स पर ब्याज की दर निकट भविष्य में ऊंची बनी रहेगी। आलोचकों ने कहा है कि इस समझौते के तहत अगले डेढ़ साल तक अमेरिका सरकार को असीमित कर्ज लेने का अधिकार मिल जाएगा। इससे राजकोषीय सेहत बेहतर करने का लक्ष्य और दूर हो जाएगा। अभी लिए गए कर्जों को भविष्य में चुकाना होगा और साथ ही सरकार पर ब्याज का बोझ बढ़ेगा। इन सब स्थितियों से अमेरिका की वित्तीय साख और कमजोर पड़ सकती है।