डीसी सुपीरियर कोर्ट के न्यायाधीश ने एक ऐतिहासिक ब्लैक चर्च- मेट्रोपॉलिटन अफ्रीकी मेथोडिस्ट एपिस्कोपल को प्राउड बॉयज ट्रेडमार्क पर नियंत्रण प्रदान किया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि प्राउड बॉयज ने 2.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर के एक निर्णय का पालन नहीं किया।
सोमवार के फैसले के तहत प्राउड बॉयज के सदस्यों को चर्च की सहमति के बिना समूह के नाम और प्रतीकों के साथ कोई भी माल बेचने से रोक दिया गया है। यह फैसला चर्च को समूह के माल की बिक्री से अर्जित धन को जब्त करने का प्रयास करने की भी अनुमति देता है।
चर्च ने नुकसान से भरपाई के लिए दायर किया मुकदमा
चर्च ने दिसंबर 2020 में डोनाल्ड ट्रंप समर्थक रैली के बाद प्राउड बॉयज के सदस्यों द्वारा की गई तोड़फोड़ से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए मुकदमा दायर किया। उस दौरान मोट्रोपॉलिटन अफ्रीकी मेथोडिस्ट सहित दो चर्चों में ब्लैक लाइव्स मैटर के बैनर फाड़े और जलाए दिए गए। विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं और उस रात गिरफ्तारियां भी की गईं।
टैरियो ने आगजनी में शामिल होने की बात कबूली थी
प्राउड बॉयज के नेता एनरिक टैरियो ने आगजनी में शामिल होने की बात कबूल की। बाद में, उन्हें इन आरोपों में पांच महीने से ज्यादा जेल की सजा सुनाई गई। इसके बाद, टैरियो को 6 जनवरी, 2021 को दंगा भड़काने के लिए संघीय जेल में 22 साल की सजा सुनाई गई।
ट्रंप द्वारा दी गई माफी में टैरियो भी शामिल थे
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पदभार ग्रहण करने के पहले दिन अमेरिकी कैपिटल पर 6 जनवरी को हुए हमले में अपराध के आरोप में 1,500 से ज्यादा लोगों को माफी दी, जिसमें टैरियो भी शामिल थे।
टैरियो ने प्राउड बॉयज का नाम बदलने का दिया सुझाव
टैरियो ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'पीठासीन न्यायाधीश ने मुझे और अन्य प्रतिवादियों को उचित प्रक्रिया से वंचित कर दिया है, जिससे हम अपनी रक्षा नहीं कर पाए।' टैरियो ने यह भी सुझाव दिया कि प्राउड बॉयज अपना नाम बदलकर 'अफ्रीकन मेथोडिस्ट एपिस्कोपल बॉयज' रख लें और नए नाम पर सुझाव मांगे।
चर्च ने कार्रवाइयों को आतंकवादी कृत्य कहा
चर्च ने 12 दिसंबर, 2020 को की गई कार्रवाइयों को 'आतंकवादी कृत्य' कहा और कहा कि उनका उद्देश्य चर्च के सदस्यों को डराना था। जून 2023 में चर्च को डिफॉल्ट निर्णय दिया गया, क्योंकि प्राउड बॉयज या उनके प्रतिनिधियों द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इसके बाद, चर्च के वकीलों ने दिसंबर में ट्रेडमार्क के अधिकार की मांग करते हुए एक प्रस्ताव दायर किया। दीवानी मुकदमे में चर्च का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। टैरियो के वकील नायब हसन ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।